सेवा संकल्प अभियान : गरीब के सम्मान से विकसित भारत के संकल्प तक का अभियान

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किसी सरकार की योजनाओं का वास्तविक मूल्य केवल बजट के आंकड़ों, स्वीकृतियों और निर्माण कार्यों से नहीं आंका जा सकता। उसकी सबसे सार्थक कसौटी यह है कि उसने सामान्य नागरिक के जीवन में कितना परिवर्तन किया, उसकी चिंता कितनी कम की और उसके सपनों को पूरा करने के लिए कितना मजबूत आधार दिया। जब वर्षों तक कच्चे मकान में रहने वाला कोई परिवार पहली बार अपने पक्के घर की छत के नीचे चैन से सोता है, जब बारिश का मौसम उसके लिए चिंता के बजाय सुकून लेकर आता है और जब एक गरीब परिवार अपने बच्चों के भविष्य को अधिक सुरक्षित महसूस करता है, तब जनकल्याण की योजना अपने वास्तविक उद्देश्य को प्राप्त करती है।

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की सार्वजनिक जीवन की यात्रा में गरीब, वंचित और अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति के जीवन में बदलाव का विषय लगातार प्रमुख रहा है। स्वयं प्रधानमंत्री ने इस यात्रा का उल्लेख करते हुए लोगों के जीवन को बेहतर बनाने और राष्ट्र की प्रगति में योगदान को अपने प्रयासों का केंद्र बताया है। उनके शासन के 25 वर्षों की इस यात्रा को जनसेवा, जनकल्याण और जन-आकांक्षाओं को शासन के केंद्र में रखने के संदर्भ में देखा जा सकता है। आज जब सेवा संकल्प अभियान के माध्यम से पूरा देश सेवा के इसी भाव को आगे बढ़ा रहा है, तब प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) जैसे कार्यक्रम इस सोच को धरातल पर समझने का अवसर देते हैं। गरीब के लिए अपना पक्का घर केवल चार दीवारें और छत नहीं होता। वह सुरक्षा है, सम्मान है, स्थायित्व है और अगली पीढ़ी के बेहतर भविष्य की बुनियाद है।

छत्तीसगढ़ के शहरों में प्रधानमंत्री आवास योजना से लाभान्वित परिवारों के अनुभव इस बदलाव को बहुत सहजता से अभिव्यक्त करते हैं। किसी परिवार के लिए पक्का घर मिलने का अर्थ बरसात में टपकती छत और सीलन से मुक्ति है। किसी के लिए सांप-बिच्छुओं और दूसरे जीव-जंतुओं के भय से निजात है। किसी श्रमिक परिवार के लिए यह सीमित आमदनी के कारण वर्षों से अधूरा पड़ा सपना पूरा होने जैसा है। किसी माता के लिए अपने बच्चों को सुरक्षित घर में बढ़ते हुए देखने का संतोष है। इन परिवारों की भावनाओं में एक बात समान रूप से दिखाई देती है—अपना घर जीवन में सुरक्षा के साथ आत्मविश्वास भी लेकर आया है।
यही वह परिवर्तन है जो किसी कल्याणकारी योजना को सरकारी कार्यक्रम से आगे बढ़ाकर सामाजिक बदलाव का माध्यम बनाता है।

गरीबी केवल आय की कमी का प्रश्न नहीं है। असुरक्षित आवास, बुनियादी सुविधाओं का अभाव और भविष्य को लेकर अनिश्चितता भी गरीब परिवार के संघर्ष को बढ़ाती है। इसीलिए गरीब कल्याण की अवधारणा को आवास, पेयजल, स्वच्छता, स्वास्थ्य, खाद्य सुरक्षा और अन्य बुनियादी आवश्यकताओं से जोड़कर देखना महत्वपूर्ण है। केंद्र सरकार और राज्य सरकार की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं का उद्देश्य इन आवश्यकताओं तक जरूरतमंद परिवारों की पहुंच बढ़ाना रहा है। 

प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) इस व्यापक सोच का प्रत्यक्ष उदाहरण है। एक गरीब परिवार जब कच्चे मकान से निकलकर अपने पक्के आवास में प्रवेश करता है तो केवल उसका पता नहीं बदलता, जीवन के प्रति उसका दृष्टिकोण भी बदलता है। मजबूत दीवारें उसे सुरक्षा देती हैं, पक्की छत चिंता कम करती है और अपना घर भविष्य के प्रति भरोसा जगाता है। घर परिवार की सामाजिक गरिमा से भी जुड़ता है। इसीलिए आवास उपलब्ध कराने का प्रयास केवल निर्माण का विषय नहीं, बल्कि सम्मान और अवसर से भी जुड़ा विषय है।

केंद्र सरकार और राज्य सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ पात्र नागरिकों तक प्रभावी ढंग से पहुंचे, यह राज्य शासन की लगातार कोशिश रही है। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार योजनाओं के क्रियान्वयन को जनसरोकारों से जोड़कर आगे बढ़ा रही है। नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के लिए भी शहरों का विकास केवल बड़ी सड़कें, भवन और अधोसंरचना तैयार करना नहीं है। शहर तभी वास्तव में विकसित होता है, जब वहां रहने वाले गरीब और जरूरतमंद परिवार भी विकास की प्रक्रिया में सहभागी हों और उन्हें सम्मानजनक जीवन के लिए आवश्यक सुविधाएं प्राप्त हों।

सेवा संकल्प अभियान का भाव भी इसी दायित्व को और मजबूत करता है—सेवा केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि शासन और नागरिक के बीच विश्वास का सेतु बने। योजनाएं कागज से निकलकर जरूरतमंद के जीवन तक पहुंचें, पात्र व्यक्ति को अपने अधिकार और अवसर के लिए अनावश्यक कठिनाई न उठानी पड़े तथा शासन की संवेदनशीलता अंतिम व्यक्ति तक अनुभव हो—यही सेवा की सार्थकता है।

विकसित भारत का लक्ष्य तभी सार्थक होगा जब विकास का अनुभव देश के प्रत्येक नागरिक के जीवन में दिखाई दे। किसी गरीब के घर की पक्की छत, किसी परिवार को मिला स्वच्छ पेयजल, किसी जरूरतमंद तक पहुंची स्वास्थ्य सुविधा और किसी युवा को मिला आगे बढ़ने का अवसर—विकास की वास्तविक तस्वीर इन्हीं परिवर्तनों से बनती है।

छत्तीसगढ़ के हमारे शहरों में जब कोई परिवार वर्षों की प्रतीक्षा के बाद अपने पक्के घर में गृह प्रवेश करता है तो उसके चेहरे की प्रसन्नता बहुत कुछ कहती है। वह प्रसन्नता केवल मकान मिलने की नहीं होती; वह सम्मान, सुरक्षा और भविष्य के प्रति पैदा हुए विश्वास की होती है। जिन परिवारों के लिए कभी बारिश का अर्थ टपकती छत और रातभर की चिंता थी, उनके लिए अब वही मौसम अपने सुरक्षित घर की खिड़की से देखने वाला मौसम बन गया है। यही परिवर्तन जनकल्याणकारी शासन को मानवीय अर्थ देता है।

सेवा से संकल्प और संकल्प से सिद्धि की यात्रा का उद्देश्य भी यही होना चाहिए कि शासन की प्रत्येक पहल का अंतिम परिणाम नागरिक के जीवन में सकारात्मक बदलाव के रूप में दिखाई दे। जब शासन का संकल्प और जनता की आकांक्षा एक दिशा में आगे बढ़ते हैं, तभी विकास आंकड़ों से निकलकर लोगों के जीवन का उत्सव बनता है।


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