मणिपुर के सीमावर्ती जिलों में खूनी टकराव, कुकी-नागा विवाद ने बढ़ाई मुश्किलें

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मणिपुर में जारी जातीय हिंसा ने एक नया और बेहद चिंताजनक रूप ले लिया है। अब तक घाटी और पहाड़ियों के बीच मैतेई-कुकी संघर्ष के रूप में देखी जा रही यह हिंसा, अब मिश्रित आबादी वाले पहाड़ी जिलों में कुकी और नागा आदिवासी समुदायों के बीच एक खूनी संघर्ष में तब्दील हो गई है।

अक्टूबर 2026 तक की रिपोर्टों और एसीएलईडी (ACLED) के आंकड़ों के अनुसार, फरवरी 2026 में भड़के इस नए कुकी-नागा विवाद में 300 से अधिक हिंसक घटनाएं हो चुकी हैं, जिनमें अब तक लगभग 100 लोगों की जान जा चुकी है।

यह जातीय संघर्ष अब मुख्य रूप से कामजोंग, कांगपोकपी, उखरुल और सेनापति जैसे पहाड़ी और सीमावर्ती जिलों में केंद्रित हो गया है। इन इलाकों में नागा और कुकी समुदायों की बस्तियां बेहद करीब हैं।

जटिल भौगोलिक परिस्थितियों के कारण मुख्य सड़कों पर सुरक्षा बेहद संवेदनशील हो गई है। इम्फाल-तमेंगलोंग (IT) रोड और राष्ट्रीय राजमार्ग-202 (NH-202) पर लगातार हो रहे हमलों में कई नागरिक और सुरक्षाकर्मी मारे गए हैं। विभिन्न नागरिक संगठनों द्वारा की गई आर्थिक नाकेबंदी के कारण पहाड़ी इलाकों में भोजन और दवाओं की भारी किल्लत हो गई है।
 


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