केरल हाईकोर्ट: शैक्षणिक संस्थानों में धरना, भूख हड़ताल और सत्याग्रह की जगह नहीं

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केरल हाईकोर्ट ने कहा है कि संवैधानिक लोकतंत्र में धरना, भूख हड़ताल और सत्याग्रह जैसी राजनीतिक गतिविधियों के लिए कोई स्थान नहीं है, विशेषकर शैक्षणिक संस्थानों में। जस्टिस अनिल के. नरेंद्रन और जस्टिस मुरली कृष्ण एस. की खंडपीठ ने एकल पीठ के उस अंतरिम आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें संस्कृत विश्वविद्यालय के निलंबित 16 छात्रों को सेमेस्टर परीक्षा में बैठने की अनुमति दी गई थी।

मामला अगस्त 2026 में श्री शंकराचार्य संस्कृत विश्वविद्यालय में हुए छात्र प्रदर्शन से जुड़ा है। इस दौरान संपत्ति को नुकसान पहुंचाने और विश्वविद्यालय के अधिकारियों के साथ दुर्व्यवहार के आरोप लगे थे। अदालत ने कहा कि विश्वविद्यालय शिक्षा के केंद्र हैं, राजनीतिक आंदोलन के नहीं। छात्रों को अपने ही कृत्यों के कारण उत्पन्न अनुशासनात्मक कार्रवाई या उपस्थिति संबंधी नियमों से छूट नहीं मिल सकती।

पीठ ने डॉ. बी.आर. आंबेडकर के विचारों का हवाला देते हुए कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में असहयोग, सत्याग्रह और सविनय अवज्ञा जैसे तरीकों का सहारा लेने से बचना चाहिए। अदालत ने शैक्षणिक परिसरों में अनुशासन बनाए रखने की आवश्यकता पर भी जोर दिया।


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