रायपुर : तहसीलदार हार्दिक श्रीवास्तव ने प्रकाशित किया अपना पहला उपन्यास 'द मैन हू वुंड द क्लॉक'

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छत्तीसगढ़ शासन के प्रशासनिक सेवा में कार्यरत और वर्तमान में रायपुर में तहसीलदार के पद पर पदस्थ हार्दिक श्रीवास्तव का पहला थ्रिलर उपन्यास 'The Man Who Wound the Clock' एमेजॉन इंडिया पर प्रकाशित व उपलब्ध हो गया है। रायपुर से ही स्वतंत्र रूप से प्रकाशित 228 पृष्ठों का यह उपन्यास साइकोलॉजिकल सस्पेंस और टाइम-लूप की एक अनोखी पटकथा पेश करता है।

क्या है उपन्यास की कहानी?

उपन्यास का मुख्य पात्र 'अर्जुन देशमुख' एक ऐसा व्यक्ति है, जो अपनी जिंदगी को अत्यधिक नियंत्रण में जीने का आदी है। दरवाजों पर दो ताले, हफ्ते के हर दिन के लिए तय शर्ट और फ्रिज पर बुरे सपनों का हिसाब रखना उसकी दिनचर्या का हिस्सा है। कहानी में मोड़ तब आता है जब दादर की एक पार्किंग में आँखें बंद करने के बाद वह खुद को एक नई जगह पाता है और उसके हाथ में एक महीने आगे की तारीख और समय (21:47) की पार्किंग पर्ची होती है। यह पर्ची उसकी खुद की संभावित मृत्यु का समय दर्शाती है, जिसे टालने के लिए उसके पास केवल 30 दिनों का समय होता है।

मुंबई की बारिश, फूलों की दुकानों और पार्किंग स्थलों की पृष्ठभूमि में रची गई यह कहानी यह सवाल उठाती है कि कोई व्यक्ति अपनी जिंदगी पर कितना नियंत्रण रख सकता है और उसे कसकर पकड़ने की क्या कीमत चुकानी पड़ती है।

लेखक के बोल और शासकीय सेवा के बीच लेखन

प्रशासनिक दायित्वों के बीच मिले सुबह और शाम के अतिरिक्त समय का उपयोग करते हुए हार्दिक ने इस पुस्तक की रचना की है। अपने अनुभव को साझा करते हुए हार्दिक श्रीवास्तव ने कहा, "हम अपनी जिंदगी को व्यवस्थित करने और नियंत्रण में रखने की जितनी कोशिश करते हैं, वह उतनी ही हाथ से फिसलती जाती है। मैं एक ऐसे व्यक्ति की कहानी लिखना चाहता था जिसे अपनी जिंदगी का वही दिन दोबारा जीने का मौका मिलता है, लेकिन बाद में उसे समझ आता है कि इसकी कीमत क्या है।"


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