सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ न्यायाधीश और राष्ट्रीय कानूनी सेवा प्राधिकरण (एनएएलएसए) के कार्यकारी अध्यक्ष, न्यायमूर्ति उदय उमेश ललित ने कहा कि बाल अश्लीलता के मामलों पर बाल तस्करी और बाल शोषण की तरह ही ध्यान दिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि एक वैधानिक प्रणाली की आवश्यकता है जो इन आपत्तिजनक सामग्री को पहचान सके और उन्हें इंटरनेट से हटा दे।

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सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ न्यायाधीश और राष्ट्रीय कानूनी सेवा प्राधिकरण (एनएएलएसए) के कार्यकारी अध्यक्ष, न्यायमूर्ति उदय उमेश ललित ने कहा कि बाल अश्लीलता के मामलों पर बाल तस्करी और बाल शोषण की तरह ही ध्यान दिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि एक वैधानिक प्रणाली की आवश्यकता है जो इन आपत्तिजनक सामग्री को पहचान सके और उन्हें इंटरनेट से हटा दे।


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