इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने एक बार फिर कहा है कि लड़का या लड़की वयस्क होने पर अपने पसंद के व्यक्ति के साथ शादी करने या साथ रहने के लिए स्वतंत्र हैं। माता पिता समेत कोई भी व्यक्ति साथी चुनने की स्वतंत्रता के उसके अधिकार में हस्तक्षेप नहीं कर सकता।

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इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने एक बार फिर कहा है कि लड़का या लड़की वयस्क होने पर अपने पसंद के व्यक्ति के साथ शादी करने या साथ रहने के लिए स्वतंत्र हैं। माता पिता समेत कोई भी व्यक्ति साथी चुनने की स्वतंत्रता के उसके अधिकार में हस्तक्षेप नहीं कर सकता।


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