सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाया है कि प्रवर्तन निदेशालय प्रतिशोध की भावना से कार्रवाई नहीं कर सकता है और धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत मनमानी गिरफ्तारी नहीं कर सकता है, यह व्यवस्था करते हुए कि केंद्रीय एजेंसी को आरोपी को गिरफ्तारी का लिखित आधार प्रस्तुत करना होगा।

feature-top

सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाया है कि प्रवर्तन निदेशालय प्रतिशोध की भावना से कार्रवाई नहीं कर सकता है और धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत मनमानी गिरफ्तारी नहीं कर सकता है, यह व्यवस्था करते हुए कि केंद्रीय एजेंसी को आरोपी को गिरफ्तारी का लिखित आधार प्रस्तुत करना होगा।

अदालत ने कहा कि इस तरह के सुरक्षा उपाय आरोपी का मौलिक और वैधानिक अधिकार दोनों हैं। इसने मनी-लॉन्ड्रिंग मामले में हरियाणा से एक पिता और पुत्र की गिरफ्तारी पर "गुप्त आचरण" के लिए केंद्रीय एजेंसी की आलोचना की।


feature-top