Babuaa Desk

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भारतीय संस्कृति में आध्यात्मिकता का स्थान सर्वोपरि है। वेद पुराण का अध्धयन और अध्यापन संसार के लिए कौतूहल का विषय रहा है। इस देश के महान ऋषि मुनियों ने श्रवण के माध्यम से आदिकाल में ग्रहण किये गए हर विषय को अपने आने वाले पीढ़ी को हस्तांतरित किया है। ये शिक्षा गुरुकुल के माध्यम से आधुनिक काल मे आगे बढ़ती गयी। संस्कृत भाषा और सरल अवधि के साथ साथ अन्य अनेक भाषाओं मे सभी विषयो का अध्धयन और अध्यापन की सतत प्रक्रिया जारी है। इस प्रक्रिया में गुरु औऱ शिष्य की परंपरा भी अनवरत काल से प्रचलन में है। आज दुनियां में हॉस्टल संस्कृति पनपी हुई है वह हमारे गुरुकुल की देन है। फर्क इतना है कि तब लकड़ी से लेकर अनाज की व्यवस्था शिष्यों को करनी पड़ती थी। बड़े बड़े राजा महाराजा के पुत्रों ने भी ये काम गुरुकुल में किया है। गुरु पूर्णिमा

13 Jul 2022 05:35AM,
by: Babuaa Desk