Babuaa Desk

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 यात्रा तन की होती है और मन की भी होती है, मस्तिष्क की भी होती है। यात्रा भौतिक होती है और आध्यात्मिक भी होती है। यात्रा सुविधाजनक भी होती है असुविधाजनक भी होती है। जाने के समय सुख की यात्रा होती है तो आने के समय दुख की भी यात्रा होती है लेकिन सबसे बड़ा सुकून होता है अपने घर वापस आने का। ऐसी ही सम्वेत यात्रा हमने भी की। हमारे परिवार के लिए सबसे अच्छी बात ये है कि कोई भी कार्यक्रम में परिवर्तन का विरोध नही करता, जो जैसा कह दे, मान लेते है, इस कारण आकस्मिक परिवर्तन से क्षणिक नाराजगी होती भी है तो वह खत्म भी हो जाती है। बहरहाल दो महीने से उधेड़बुन के बाद ये तो तय हो गया कि हिमालय के विशाल उचाईयों पर स्थित चार धाम बद्रीनाथ, केदारनाथ,गंगोत्री,यमनोत्री की आध्यात्मिक- धार्मिक यात्रा पर जाना है। उम्र के हिसाब से सभी 50 पार थे इस कारण निरंतरता के बजाय टुकड़े टुकड़े यात्रा को प्राथमिकता दी गयी। एक उम्र के बाद थकान जीवन का हिस्सा बनती है। मेरा अपना मानना है कि 40 से 45 आयु के बीच इन स्थानों की यात्रा ज्यादा उत्साहजनक होगी क्योंकि उम्र के साथ ऊर्जा की कमी स्वाभाविक प्रक्रिया है। हमारी यात्रा की शुरुआत रायपुर से दिल्ली के बाद दिल्ली से पूर्व से बुक कराए गए टेम्पोट्रेक्स से होने वाली थी ।दिल्ली में एडवांस राशि लेने के बाद आमतौर पर सुविधा देने से मुकरने का रिवाज है इस कारण दिल्ली से बचा जाए या फिर किसी सस्ते होटल पर रुक कर लंबी यात्रा के लिए वाहन को देखभाल करने के बाद फाइनल करे। पहाड़ी क्षेत्र में रात के 7 बजे के बाद यात्रा न करने की सलाह शासकीय तौर पर है , पहाड़ी रास्तो पर औसतन 20 -22 किलोमीटर / घंटे वाहन चल पाते है। इस कारण जहाँ की भी यात्रा करे।सुबह जल्दी निकल जाए।  बद्रीनाथ,केदारनाथ, गंगोत्री, मदुरै और रामेश्वरम यात्रा

21 May 2022 05:36AM,
by: Babuaa Desk