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केंद्रीय मंत्री मनसुख मंडाविया ने रविवार को गुजरात के अंकलेश्वर में भारत बायोटेक की चिरोन बेहरिंग वैक्सीन सुविधा से कोवैक्सिन का पहला व्यावसायिक बैच जारी किया।
उन्होंने कहा, “भारत देश में कोविड -19 के प्रसार को धीमा करने पर केंद्रित है, और इसे प्राप्त करने की कुंजी टीकों के तेज और कुशल प्रशासन में निहित है। हम प्रत्येक भारतीय नागरिक तक वैक्सीन की समान पहुंच सुनिश्चित करना चाहते हैं, और भारत बायोटेक द्वारा कोवैक्सिन उत्पादन सुविधाओं का विस्तार हमें इस लक्ष्य के करीब ले जाएगा।”
उन्होंने यह भी कहा कि रविवार से शुरू होने वाले अंकलेश्वर संयंत्र की प्रति माह कम से कम 10 मिलियन खुराक की विनिर्माण क्षमता है।

30 Aug 2021 09:26AM,
by: Babuaa Desk
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इस साल की शुरुआत में अप्रैल में, गुहा को कोविड -19 के साथ पता चला था और एक महीने से अधिक समय तक अस्पताल में भर्ती रहे थे। उन्हें हाल ही में फेफड़े और मूत्र पथ की समस्याओं के कारण फिर से अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा था। पीटीआई ने उनके परिवार के हवाले से कहा कि एक बड़े पैमाने पर कार्डियक अरेस्ट के बाद कोविड की जटिलताओं के कारण रविवार को रात करीब 11.30 बजे उनका निधन हो गया।
पेशे से एक चार्टर्ड एकाउंटेंट, गुहा सबसे लोकप्रिय लेखकों में से एक थे, जिन्होंने लोकप्रिय बच्चों के चरित्र रिजुदा और उनके सहयोगी रुद्र को बनाया, जो जंगलों का पता लगाते हैं। उनके उपन्यासों और लघु कथाओं में प्रकृति और जंगल आवर्ती विषय थे। उन्हें उनके उपन्यास मधुकोरी के लिए सबसे ज्यादा याद किया जाता है जिसे बंगाली साहित्य में एक मील का पत्थर माना जाता है। प्रसिद्ध बंगाली लेखक बुद्धदेव गुहा का कोलकाता में निधन

30 Aug 2021 08:26AM,
by: Babuaa Desk
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 कृष्ण कैसे किसी एक के हो सकते है?  कृष्ण तो   बाल है गोपाल है,सखा है, प्रेम है, बंधुत्व है,मार्गदर्शक है, गुरु है गोविंद है, प्रबंध है और न जाने क्या क्या है।इतने विराट कि उनके तेज़ को देखा नही जा सकता इतने पराक्रमी कि अकेले ही महाभारत हरा जीता सकते है बिना किसी अस्त्र शस्त्र उठाये बगैर?  ऐसे में व्यक्तिगत कृष्ण की बात असहज लग सकती है और लगना भी चाहिए। मेरे लिये कृष्ण एक सहज उपलब्ध व्यक्ति भी औऱ व्यक्तित्व भी।हर व्यक्ति के जन्म के साथ ही कृष्ण का जन्म होता है क्योंकि जितने भी भगवान को हमने जाना है सुना है वे सम्पूर्ण व्यक्ति थे उनके कार्य ही इतने सराहनीय हुए होंगे कि वे ईश्वर स्वरूप बन गए होंगे लेकिन कृष्ण तो जन्मे भी और  बड़े भी हुए।वे  नटखट भी थे  और परिस्थितियों को भांपने वाले थे। एक बच्चा जितनी शरारत कर सकता है उतना उन्होंने भी किया। संदीपन के शिष्य बने तो आदर्श विद्यार्थी बनने के साथ सहपाठी भी बने। मित्रता की तो निभाया।प्रेम किया तो संदर्भ बदल दिया।प्रेम में समानता तो होती है लेकिन सद्भावना की मिसाल उन्होंने कायम की। प्रेम में निश्छलता उनका गुण रहा इस कारण वे देवकी, यशोदा  राधा,मीरा,सुभद्रा, द्रोपदी सहित रुक्मिणी जैसी महिलाओ के आदर्श  भी रहे।
 दुनियां में  उनके जैसा प्रबधंक कोई नही रहा। वे युद्ध मे भी शांति के अंतिम अवसर की संभावना को टटोलते रहे।युद्ध अनावश्यक लगा तो युद्ध छोड़ दिया।  सहायता के लिए वे समग्र रहे। सबकी मदद की। यही कारण था कि वे कौरव पांडव को अपने दरबार से खाली हाथ न जाने नहीं दिया वे सशक्त थे लेकिन अशक्त सुदामा हो द्रोपदी या भीष्म या द्रोण या कर्ण या कुंती सभी को मौके पर मदद कर वे सभी के तारणहार बने
।युद्ध की अपरिहार्यता पर वे सारथी बने और मार्गदर्शक भी। नीति भी सिखाया अनीति भी । युद्ध शक्ति से नहीं बुद्धि भी जीता जाता है।
ऐसे कृष्ण तो सभी के है
मेरे कृष्ण इन सबसे जुदा है।मेरे कृष्ण मुझे सामर्थ्य देते है।मेरा अपना मानना है हर व्यक्ति का अपना कुरुक्षेत्र होता है।हर व्यक्ति खुद में एक महाभारत लड़ता है।हर व्यक्ति के  भीतर एक महाभारत चलता है,हर व्यक्ति के इर्दगिर्द भीष्म,द्रोण कर्ण विदुर होते है, तो  धृतराष्ट्र,शकुनि दुर्योधन, अस्वस्थामा, जयद्रथ , दुःशासन  भी होते है।  इन सबसे दो चार होना पड़ता है। मेरे कृष्ण मेरे साथ होते है।प्रबंधन के साथ, प्रबंधक बनकर
सभी को मेरे कृष्ण जन्म की शुभकामनाएं मेरे कृष्ण!

30 Aug 2021 07:00AM,
by: Babuaa Desk