04 Sep 2024

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खेल ओर खिलाड़ी विषयो पर लेख लिखने से पहले उनके प्रदर्शन को देखना अनिवार्य होता है। इसे उनकी मेहनत को साकार होते देखा जा सकता है। आदमी, सामाजिक प्राणी है। परिवार, समाज में  रहता है ।मनुष्य होने के कारण उसके मनोभाव दिखते है। किसी भी व्यक्ति में अपने या अपने परिवार के सदस्य को देखना साधारण बात है। इन दिनों पेरिस में पैरा ओलंपिक खेलों का आयोजन चल रहा है। ये खेल उन लोगो के लिए है जिनके सारे अंग नहीं है।वे संपूर्णांग न होकर विकलांग है। उनमें से अनेक खिलाड़ियों को देख कर मन द्रवित हो जाता है लेकिन अगले ही पल उनके प्रति सम्मान बढ़ जाता है ये सोच कर कि विपरीत परिस्थितियों में भी इन्होंने हिम्मत नही हारी। एक अंग न होने पर बहाना नहीं बनाया, कृपा के पात्र नहीं बने बल्कि खुद को ऐसे सांचे में ढाला कि आज करोड़ो अरबों लोग इनके प्रदर्शन पर तालियां बजा रहे है। धनुर्धर शीतल कुमारी और प्रेरणा

04 Sep 2024 10:49AM,
by: Babuaa Desk