11 Jun 2023

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भारतीय संस्कृति में वैदिक युग से लेकर रामायण और महाभारत महाग्रन्थ काल मे गुरु, परिवार औऱ समाज के उम्र में बड़े व्यक्तियों के पैर छू कर सम्मान देने की परंपरा का निर्वाह आज भी हो रहा है। एयरपोर्ट जिसे आर्थिक रूप से समृद्ध लोगो का जमावड़ा माना जाता है आप सार्वजनिक रूप से इस परम्परा को निर्वाहित होते देख सुकून पा सकते है। कबीर दास ने इन पंक्तियों में कि -" गुरु गोविंद दोऊ खड़े, काकू लागू पाय, बलिहारी गुरु आपकी गोविंद दियो बताय" में किसके पैर पहले छुए जाने है की महत्ता बताई है। रामायण में 14 साल के वनवास की मांग करने वाली कैकेयी के पैर छूकर उनके बड़े होने का सम्मान दिया था। महाभारत काल में भीष्म पितामह ने दुर्योधन को बड़ो के पैर छूने पर आशीर्वाद मिलने का गुण बताया था। हाल ही में दो घटनाएं ऐसी घटी जिसे सोशल मीडिया में सम्मान संस्कृति से जोड़ कर बड़प्पन के रूप में दिखाया गया। पहला था पापुआवन्यू गिनी के राष्ट्र प्रमुख जेम्स मरापे का भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का सार्वजनिक रूप से पैर छूकर सम्मान देना और दूसरा आईपीएल फाइनल में चेन्नई सुपरकिंग्स के विजेता होने के बाद रविन्द्र जडेजा की पत्नी रिवाबा जडेजा( भारतीय जनता पार्टी की विधायक) जडेजा द्वारा सार्वजनिक रूप से रविंद्र जडेजा का पैर छूना। आम जनमानस में दोनो घटनाओं ने बड़ो के सम्मान को लेकर इन पर टिप्पणी की। पैर छूना सम्मान का चर्मोत्कर्ष

11 Jun 2023 06:39AM,
by: Babuaa Desk