19 Jun 2023

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मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने आज अपने निवास कार्यालय में छत्तीसगढ़ में पत्रकारिता के जनक और साहित्यकार पंडित माधवराव सप्रे की जयंती पर उनके छायाचित्र पर माल्यार्पण कर उन्हें नमन किया। सप्रे जी को याद करते हुए मुख्यमंत्री श्री बघेल ने कहा कि सप्रे जी द्वारा रखी गई नींव पर ही आज छत्तीसगढ़ की पत्रकारिता समृद्ध हो रही है। छत्तीसगढ़ में राष्ट्रीय और साहित्यिक चेतना को विकसित करने में भी सप्रे जी का अमूल्य योगदान रहा है। स्वतंत्रता संग्राम के दौरान उनकी लेखनी ने सैकड़ों सत्याग्रहियों का मार्गदर्शन किया और राष्ट्रप्रेम की प्रेरणा दी। सप्रे जी के रचनात्मक और मूल्यपरक लेखन ने छत्तीसगढ़ में पत्रकारिता को एक नई दिशा दी है।  मुख्यमंत्री ने पंडित माधवराव सप्रे की जयंती पर उन्हें नमन किया

19 Jun 2023 02:14PM,
by: Tikendra Sinha
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मुख्यमंत्री  भूपेश बघेल ने प्रदेशवासियों को रथयात्रा की बधाई और शुभकामनाएं दी है। उन्होंने इस अवसर पर भगवान जगन्नाथ से सभी नागरिकों की सुख, समृद्धि और खुशहाली की प्रार्थना की है। श्री बघेल ने रथयात्रा की पूर्वसंध्या पर जारी अपने बधाई संदेश में कहा है कि भारत में महाप्रभु जगन्नाथ के धाम पुरी सहित सभी स्थानों में रथयात्रा निकाली जाती हैं। यह भारत की मजबूत सांस्कृतिक एकता और सौहार्द्र का प्रतीक है। मुख्यमंत्री ने कहा है कि प्राचीन काल से ही छत्तीसगढ़वासियों की भगवान जगन्नाथ में गहरी आस्था रही है। उत्कल समाज के साथ सभी छत्तीसगढ़वासी प्रतिवर्ष भक्ति भाव और श्रद्धा के साथ भगवान जगन्नाथ, उनके भाई बलभद्र और बहन देवी सुभद्रा की रथयात्रा निकालते हैं। मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों को रथयात्रा की दी बधाई

19 Jun 2023 02:14PM,
by: Tikendra Sinha
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संस्कृत में सूरज के बहुत से पर्यायवाची नामों में से एक है अंबु तस्कर। पानी चुरा लेने वाला, क्योंकि तालाब और अन्य जलाशयों का अधिकतर पानी सूरज की गर्मी की वजह से सूख जाता है। इसलिए तालाबों का ढलान इस तरह से रखा जाता है ताकि अधिकतम पानी सुरक्षित रह सके। छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल ने नरवा योजना के माध्यम से भूमिगत जल को रिचार्ज करने का कार्य किया है ताकि पानी की हर एक बूंद को सुरक्षित रखा जा सके। इससे नाले भी अमूमन बारहमासी रहते हैं और भूमिगत जल का स्तर भी बढ़ जाता है जिसकी वजह से किसान रबी फसल भी बेहतर तरीके से ले पा रहे हैं। छत्तीसगढ़ में नरवा योजना के अंतर्गत लगभग 28 हजार नालों को चयनित किया गया है और इसमें 12 हजार से अधिक नाले उपचारित कर लिये गये हैं। इसके परिणामस्वरूप भूजल स्तर में 10 से 22 सेमी तक वृद्धि हुई है। जहां बांध जैसी अधोसंरचनाएं काफी जगह घेरती हैं और सीधे एक्सपोजर होने की वजह से इनमें पानी का भी नुकसान होता है ग्राउंड वाटर रिचार्ज की नरवा योजना में पानी और भूमि दोनों का ही नुकसान नहीं होता।

19 Jun 2023 02:14PM,
by: Tikendra Sinha