20 Jul 2024

Generic placeholder image

छत्तीसगढ़ विधानसभा के अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह और उप मुख्यमंत्री तथा नगरीय प्रशासन एवं विकास मंत्री श्री अरुण साव ने आज राजनांदगांव में नगर निगम द्वारा कराए जाने वाले 13 करोड़ 81 लाख रुपए लागत के 96 विकास कार्यों का भूमिपूजन किया। इनमें अधोसंरचना मद के अंतर्गत सात करोड़ 54 लाख रुपए लागत के रोड, नाली, भवन, उद्यान एवं अन्य विकास कार्य, 15वें वित्त आयोग के तहत पांच करोड़ 50 लाख रुपए लागत के सीसी रोड, नाली, नाला व फिल्टर प्लांट में विकास कार्य, सांसद निधि से 29 लाख रुपए की लागत के भवन, शेड, पाथवे, मंच निर्माण तथा विधायक निधि, प्रभारी मंत्री निधि से 49 लाख रुपए लागत के भवन, शेड, रोड तथा नाली निर्माण के कार्य शामिल हैं। राजनांदगांव के पद्मश्री गोविंदराम निर्मलकर ऑडिटोरियम में आयोजित भूमिपूजन कार्यक्रम में सांसद श्री संतोष पाण्डेय और महापौर श्रीमती हेमा देशमुख भी विशिष्ट अतिथि के रूप में शामिल हुईं।  नागरिकों के सपनों के अनुरूप शहर का होगा विकास : डॉ. रमन सिंह

20 Jul 2024 02:56PM,
by: Tikendra Sinha
Generic placeholder image

बिलासपुर कलेक्टर श्री अवनीश शरण ने आज सिम्स और जिला अस्पताल का निरीक्षण किया। इलाज करा रहे मरीजों से मुलाकात कर कुशलक्षेम पूछा। उनका अच्छे से देखरेख और इलाज करने के निर्देश डॉक्टरों को दिए। उन्होंने यहां मलेरिया और डायरिया के मरीजों के लिए बेड बढ़ाने के निर्देश दिए हैं। कलेक्टर ने स्वास्थ्य विभाग को निर्देश दिए कि जिला अस्पताल में मलेरिया और डायरिया प्रभावित मरीजों के लिए आपात स्थिति में 15 आईसीयू के बेड और 20 सामान्य बेड बढ़ाया जाए। इसी प्रकार सिम्स में 10 आईसीयू बेड बढ़ाने कहा। कलेक्टर श्री अवनीश शरण ने मरीजों की बेहतर निगरानी और इलाज के निर्देश दिए हैं। ग्रामीणों को समझाइश दी गई है कि किसी भी प्रकार की स्वास्थ्य की समस्या होने पर झाड़-फूंक या झोलाछाप डॉक्टर से इलाज न कराकर तत्काल स्वास्थ्य केंद्र जाकर इलाज कराएं। 

20 Jul 2024 02:56PM,
by: Tikendra Sinha
Generic placeholder image

यह पहाड़ी कोरवा समारिन बाई है। कुछ दिन पहले तक इन्हें गिनती के कुछ लोग ही जानते थे। यह सिर्फ इनकी ही बात नहीं है। इनके गाँव की भी यहीं बात है। घने जंगल के बीच मौजूद इनके गाँव टोकाभांठा को भी बहुत कम लोग जानते हैं। मुख्य सड़क से दूर टोकाभांठा में रहने वाली पहाड़ी कोरवा समारिन बाई का जीवन भी घने जंगल में बसे गाँव की तरह गुमनाम सा था। जहाँ सुबह का सूरज तो रोज निकलता था, लेकिन इनकी जिंदगी में गरीबी का अंधेरा जस का तस रहता था। दिन के उजाले में पहाड़ के नजदीक पहाड़ जैसी जिंदगी जीने वाली समारिन बाई ने कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि एक दिन उन्हें नौकरी मिल जायेगी और अंधेरे से घिरी गरीबी को दूर कर कडुवाहट भरी जिंदगी में मिठास तथा जीवन में उल्लास का उजियारा लाएगी।

20 Jul 2024 02:56PM,
by: Tikendra Sinha