27 Sep 2023

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मुख्यमंत्री भूपेश बघेल अक्सर अपने प्रोटोकाल से इतर लोगों से मिलने के लिए रूक जाते हैं और बच्चों के प्रति उनके स्नेह से सभी वाकिफ हैं। इसी कड़ी में मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल का मानवीयता से भरा एक और चेहरा देखने को मिला। दरअसल तात्यापारा के नवीन मार्केट में लोक निर्माण विभाग के भूमिपूजन कार्यक्रम में पहुंचे मुख्यमंत्री ने मंच से देखा कि एक एंबुलेंस वाहनों के जाम में फंस गयी है और उसे निकलने का रास्ता नहीं मिल रहा है। जैसे ही मुख्यमंत्री की नजर एंबुलेंस पर पड़ी उन्होंने अपने प्रोटोकाल के विपरीत जाकर तुरंत ही कार्यक्रम को रोकने का इशारा किया और खुद ही अपनी कुर्सी छोड़कर एंबुलेंस को रास्ता देने की अपील करने लगे। मुख्यमंत्री के खड़े होने के बाद तुरंत ही वाहनों ने एंबुलेंस को रास्ता दिया इसके बाद मुख्यमंत्री वापस अपनी कुर्सी पर बैठे और कार्यक्रम शुरू हुआ। मुख्यमंत्री के इस मानवीय पहल से वहां उपस्थित हर किसी ने उनकी जमकर तारीफ की और मुख्यमंत्री के सहृदयता की खूब सराहना भी की।

27 Sep 2023 11:51AM,
by: Tikendra Sinha
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छत्तीसगढ़ में यात्री बसों में महिलाओं एवं स्कूल बसों में विद्यार्थियों की सुरक्षा को सुनिश्चित करने के लिए निर्भया फ्रेमवर्क के अंतर्गत सभी स्कूल बस में पैनिक बटन लगाया जाएगा और व्हीकल ट्रैकिंग सॉफ्टवेयर के माध्यम से गाड़ियो की ट्रैकिंग किया जाएगा। पैनिक बटन लगने से बस में किसी प्रकार की दुर्घटना, छेड़छाड़ होने पर पैनिक बटन दबाने से तुरंत निर्भाया कमांड सेंटर और पुलिस विभाग के डायल 112 को सूचना मिल जाएगी। इसके साथ ही बसों का लोकेशन, स्पीड आदि का भी पता चलता रहेगा। इससे बसे नियंत्रित गति से चलेगी, जिससे हादसे की आशंका भी कम हो जाएगी। जीपीएस सिस्टम का कंट्रोल रूम डायल 112 के कार्यालय में बनाया गया है। 

27 Sep 2023 11:50AM,
by: Tikendra Sinha
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5 दशक तक फिल्मों में टिका रहना बहुत कम नायक नायिकाओं के नसीब में आता है।वहीदा रहमान भी भारतीय फिल्म इंडस्ट्री की सशक्त नायिका रही है जिन्होंने ब्लेक एंड व्हाइट से कलरफुल फिल्मों के दौर में अभिनय किया वह भी ऐसा कि तब के जमाने के हर नायक उनको नायिका बनाना चाहते थे। देवआनंद तो अपने भाई विजय आनंद के विरोध के बावजूद गाइड मे वाहिदा रहमान को नायिका बनाये थे। 1957 में गुरुदत्त की फिल्म "प्यासा" से लेकर 2006 में आई फिल्म "रंग दे बसंती" तक वहीदा रहमान के अभिनय का सफर जारी रहा। वहीदा रहमान ने प्यासा, कागज के फूल, काला बाजार, चौदहवीं का चांद, साहिब बीबी औऱ गुलाम, बीस साल बाद, मुझे जीने दो, कोहरा ,तीसरी कसम जैसे ब्लेक एंड व्हाइट फिल्मों में काम करने के बाद गाइड, राम औऱ श्याम,पत्थर के सनम, आदमी, नीलकमल,ज्वेल थीफ, प्रेम पुजारी जैसे कलरफुल फिल्मों में काम किया। अपनी दूसरी पारी में वहीदा रहमान, अमिताभ बच्चन की अदालत,कभी-कभी, त्रिशूल, नमक हलाल, महान, कुली फिल्मों में माँ की भी भूमिका निभाई। उनके दीर्घ अभिनय यात्रा के योगदान के चलते वहीदा रहमान सातवी नायिका औऱ नौंवी महिला बनी है जिन्हें दादा साहेब फाल्के पुरस्कार मिला है। लगातार तीसरे साल नायिकाओं को ये पुरस्कार मिला है। 2020 में आशा पारेख, 2022 में रेखा और अब वहीदा रहमान को ये पुरस्कार मिलना नारी सशक्तिकरण की दिशा में बढ़ता कदम भी मान सकते है। दादा साहेब फाल्के पुरस्कार की शुरुवात ही नायिकाओं से हुई थी। 1969 में देविका रानी को ये पुरस्कार मिला। कानन देवी, सुलोचना औऱ दुर्गा खोटे, के बाद 42 साल तक नायिकाओं को दादा साहेब फाल्के पुरस्कार नही मिलना भी आश्चर्य की बात है।

27 Sep 2023 06:03AM,
by: Babuaa Desk