29 Aug 2021

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क्या राजीव गांधी खेल रत्न के नाम परिवर्तन कर ध्यानचंद खेल रत्न नाम करना ध्यानचंद को भारत रत्न न देने की साज़िश है? ये बात जेहन में बहुत दिनों से घूम रही है क्योकि पहले तो यदि किसी व्यक्ति के नाम पर कोई पुरस्कार योजना चल रही है तो पहले तो उस नाम को चलने देने में कोई आपत्ति नही होना चाहिए। हर देश मे राजनैतिक दलों ने ये आज़ादी ली हुई है कि उनके सत्ता काल मे वे अपने सर्वश्रेष्ठ व्यक्तित्व को याद रखने के लिए योजनाये बनाएंगे, सड़क, ओवरब्रिज , नहर, पुल, बांध, भव्य इमारत, अस्पताल,हवाई अड्डा, बनाएंगे तो उनके नाम का करण करेंगे। देश मे दलो की राजनीति चलती रहती है परिवर्तन भी होता है जिसके कारण विचार भी नए आते है। फिलहाल देश मे गुलामी को याद दिलाने वाले ऐसे बहुत से स्थानों के नाम परिवर्तन को हम देख रहे है। अच्छा है गुलाम मानसिकता से निजात मिलना चाहिए और देश को उन व्यक्तियों को याद रखने और सम्मान देने के लिए इतिहास को खंगालना चाहिए जिन्हें भले ही देश को गुलाम रखनेवालों ने आतंकवादी माना या उनके नामो को विस्मृत कराने की साज़िश रची। उन्हें स्वतंत्रता संग्राम के सेनानी माना जाना चाहिए और वे लोग जो गुलामी के दौर मे कला सहित अन्य क्षेत्र में विभूति रहे उनको सम्मान देने की स्वस्थ परंपरा बननी चाहिए। "ध्यानचंद भारतरत्न" क्यो नहीं...?

29 Aug 2021 12:15PM,
by: Babuaa Desk