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रायगढ़ : प्रोजेक्ट लागत कम करने के लिए मुआवजा राशि को कम करना नैसर्गिक न्याय का उल्लंघन
रायगढ़ के मेडिकल कॉलेज रोड का मामला
किसी भी प्रोजेक्ट लागत को कम करने के लिए मुआवजा दरों और मुआवजा गणना की प्रक्रिया में हेर फेर करके मुआवजा राशि को कम करना न केवल नैसर्गिक न्याय का उल्लंघन है बल्कि भूमि अधिग्रहण कानून 2013 के अंतर्गत माननीय उच्चतम न्यायालय के आदेशों की स्पष्ट अवमानना है। हालांकि हमारे प्रदेश में प्रशासनिक अधिकारी माननीय न्यायालय को गंभीरता से नहीं लेते और प्रतिदिन उनके आदेशों निर्देशों की अवमानना करते रहते हैं क्योंकि उन्हें यह मालूम है कि सरकार उनके साथ है और माननीय न्यायालय ऐसे मौकों पर केवल चेतावनी देकर छोड़ देता है । जिसके कारण उनके हौसले बुलंदी पर है अब यह एक परंपरा बन चुकी है ।
वर्तमान में कलेक्टर गाइडलाइन के रेट बहुत बढ़ाए गए जिसका पुरजोर विरोध हुआ जिसके कारण सरकार को बैक फुट पर आना पड़ा और उन्होंने कई स्थानों के रेट फिर से कम कर दिए। परंतु जनता को अंधेरे में रखकर उन्होंने मुआवजा गणना की प्रक्रिया में जो फेरबदल कर दी उसके कारण कुछ स्थानों में पुरानी गाइडलाइन के अनुसार मिलने वाले मुआवजा राशि से एक तिहाई मुआवजा राशि प्राप्त होगी ऐसा ही उदाहरण रायगढ़ के मेडिकल कॉलेज रोड पर देखा गया जहां सड़क और पुलिया चौड़ीकरण में उपयोग होने वाली निजी भूमि के मुआवजा राशि को कम करने के उद्देश्य से गणन विधि में ही परिवर्तन कर दिया गया है। साथ ही मुआवजा राशि को कम करने के उद्देश्य से स्वयं शासन द्वारा निर्धारित राजपत्र में प्रकाशित नियमावली के अनुसार बीच सड़क से दोनों तरफ की भूमि अधिग्रहीत करने की जगह केवल बायीं ओर पूरे सड़क चौड़ीकरण की भूमि अधिग्रहित की जा रही है। जिसका मूल कारण मुआवजा राशि में कमी करना और दाहिने तर के सत्ता रूढ़ दल के लोगों को फायदा पहुंचाना शामिल है ।
अब प्रश्न यह उठता है कि जहां माननीय उच्चतम न्यायालय की स्पष्ट टिप्पणी है की निष्पक्ष और न्यायसंगत मुआवजा दिया जावे उन्होंने 7 मई 2025 को कहा कि भूमि अधिग्रहण के लिए मुआवजा यांत्रिक तरीके से निर्धारित नहीं किया जा सकता है, बल्कि समानता, इक्विटी और न्याय के विचारों से निर्देशित होना चाहिए। कोर्ट ने जोर दिया कि समान स्थान और विकास क्षमता वाली भूमि को समान मुआवजा मिलना चाहिए, जब तक कि स्पष्ट, वस्तुनिष्ठ अंतर इसे उचित न ठहराएं।
परंतु छत्तीसगढ़ शासन विशेष कर रायगढ़ प्रशासन इससे इत्तेफाक नहीं रखता यहां पर यह भी उल्लेखनीय है कि पिछले कई वर्षों में इसी मार्ग पर भूमि की जितनी लेनदेन हुई है और उसके पंजीयन हुए हैं वह स्क्वायर फिट दर पर हुए हैं जबकि शासन द्वारा अब स्क्वायर फिट को हटा दिया गया है और केवल हेक्टेयर दर पर मुआवजा आकलन करने के निर्देश दिए गए हैं । यानि लेते वक्त स्क्वायर फिट दर और देते समय हेक्टेयर दर । जिसके कारण किसानों का मुआवजा एक तिहाई हो गया है अब पीड़ित किसान इस मुद्दे को लेकर शासकीय कार्यालयों के चक्कर लगा रहे हैं ।
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