महाराष्ट्र सरकार ने मानी आदिवासी छात्रों की मांगें; 17 दिनों से जारी भूख हड़ताल खत्म

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महाराष्ट्र सरकार द्वारा आंदोलनकारी आदिवासी छात्रों की सभी प्रमुख मांगों को स्वीकार किए जाने के बाद, पिछले 17 दिनों से चल रही अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल समाप्त हो गई है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और आदिवासी विकास मंत्री अशोक उइके के साथ हुई उच्च स्तरीय बैठक और लिखित आश्वासन के बाद पुणे, नासिक और नागपुर में छात्रों ने अपना आंदोलन वापस ले लिया।

समझौते के मुख्य बिंदु और निर्णय:

  • रिक्त पदों पर भर्ती: अनुसूचित जनजाति (ST) के लिए आरक्षित 12,500 सरकारी पदों को समयबद्ध तरीके से भरने की प्रक्रिया तुरंत शुरू की जाएगी।

 

  • फर्जी जाति प्रमाण पत्र पर कार्रवाई: आदिवासी कोटे का गलत लाभ उठाने के लिए फर्जी जाति प्रमाण पत्र का उपयोग करने वालों के खिलाफ तत्काल आपराधिक मामला दर्ज किया जाएगा।

 

  • डीबीटी योजना रद्द: छात्रों के विरोध को देखते हुए भोजन के लिए लागू डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) योजना को रद्द कर दिया गया है। सेंट्रल किचन सिस्टम की जांच के लिए 15 से 30 दिनों के भीतर एक ऑडिट कमेटी बनाई जाएगी।

 

  • पेसा (PESA) कर्मचारियों की बहाली: पेसा कानून के तहत काम करने वाले आदिवासी कर्मचारियों को सेवा में बहाल कर स्थायी किया जाएगा।

 

  • सुरक्षा और बुनियादी ढांचा: गढ़चिरौली के आश्रम स्कूल में सांप के काटने से हुई तीन छात्राओं की दुखद मृत्यु के बाद, सरकार ने सभी आदिवासी आवासीय स्कूलों में सुरक्षा और बुनियादी ढांचे को अपग्रेड करने तथा पीड़ित परिवारों को मुआवजा देने की बात मानी है।

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