गलवान टिप्पणी विवाद: राहुल गांधी के केस में ‘VVIP’ आरोप पर सुप्रीम कोर्ट का जवाब

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सुप्रीम कोर्ट ने कांग्रेस नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के खिलाफ लंबित एक मानहानि मामले की सुनवाई के दौरान साफ किया कि "अदालत के समक्ष सभी मामलों को समान रूप से देखा जाता है।" मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने यह टिप्पणी तब की जब शिकायतकर्ता के वकील ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी को 'वीवीआईपी' तवज्जो मिल रही है और अंतरिम रोक का फायदा उठाने के कारण इस मामले को नियमित सुनवाई के लिए सूचीबद्ध नहीं किया जा रहा है l

क्या है पूरा विवाद और सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी?

यह मामला राहुल गांधी द्वारा दिसंबर 2022 की 'भारत जोड़ो यात्रा' के दौरान भारतीय सेना और चीनी सैनिकों के बीच हुई झड़प (गलवान घाटी के संदर्भ में) को लेकर की गई कथित अपमानजनक टिप्पणियों से जुड़ा है l निचली अदालत द्वारा समन जारी किए जाने के बाद, इलाहाबाद हाई कोर्ट ने इस पर रोक लगाने से इनकार कर दिया था, जिसके खिलाफ राहुल गांधी ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था. सुप्रीम कोर्ट ने पिछले साल अगस्त में इस सुनवाई पर अंतरिम रोक लगा दी थी l

  • शिकायतकर्ता के वकील का आरोप: मामले में शिकायतकर्ता उदय शंकर श्रीवास्तव की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता गौरव भाटिया ने दलील दी कि कोर्ट के पिछले आदेशों के बावजूद रजिस्ट्री द्वारा इस मामले को लिस्ट नहीं किया जा रहा है l उन्होंने मांग की कि इस मामले को अन्य याचिकाओं से अलग (De-tag) कर स्वतंत्र रूप से सुना जाए l
  • सुप्रीम कोर्ट का जवाब: इस 'वीवीआईपी' वाले आरोप को खारिज करते हुए चीफ जस्टिस (CJI) सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने कहा, “सभी मामलों को समान रूप से देखा जाता है। आप प्रक्रिया का पालन करें और शीघ्र सुनवाई की मांग करते हुए एक उचित आवेदन दायर करें।”  अदालत ने गौरव भाटिया को मामले को अलग करने के लिए एक औपचारिक आवेदन देने का निर्देश दिया l

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