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Pakistan: सत्ता के लिए समझौते करती पीपीपी
वर्ष 1967 में जुल्फिकार अली भुट्टो द्वारा स्थापित पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (पीपीपी) ने अपनी नीतियों और घोषणापत्रों के साथ अपने समय से आगे बेहद प्रगतिशील पार्टी के रूप में शुरुआत की, जिसने संघर्षरत जनता को 'रोटी, कपड़ा और मकान' मुहैया कराने पर जोर दिया। लेकिन आज आसिफ अली जरदारी के नेतृत्व में यह पार्टी प्रगतिशील नहीं रह गई है और सत्ता में बने रहने के लिए इसने कई समझौते किए हैं। इसका जनाधार केवल सिंध तक सीमित रह गया है, बाकी पाकिस्तान में इसकी शायद ही महत्वपूर्ण उपस्थिति है। पंजाब वह प्रांत है, जहां पीपीपी का जन्म हुआ और जहां उसकी बड़ी मौजूदगी थी, क्योंकि तब यह महत्वपूर्ण राज्य था। वर्ष 2022 में भी मुल्क का प्रधानमंत्री बनने के लिए पंजाब पर नियंत्रण जरूरी है।
पाकिस्तान में उग्रवाद और आतंकवाद एक बड़ा मुद्दा है। हालांकि 1967 में आतंकवाद कोई मुद्दा नहीं था, पर जैसे-जैसे समय बीतता गया और बेनजीर भुट्टो ने पीपीपी की कमान संभाली, आतंकवाद एवं उग्रवाद का मुद्दा प्रमुख होता चला गया। जब बेनजीर प्रधानमंत्री बनीं, अफगानिस्तान युद्ध में उलझा हुआ था और उसका असर पाकिस्तान पर पड़ना शुरू हो गया था। बेनजीर और पीपीपी के लिए उग्रवाद और आतंकवाद के मुद्दे बहुत महत्वपूर्ण थे और इस पर बहुत ध्यान दिया गया था। जब आतंकवादियों द्वारा बेनजीर की हत्या कर दी गई थी, तब आसिफ अली जरदारी के नेतृत्व में पार्टी ने आतंकवाद का मुद्दा उठाना जारी रखा। मुल्क के किसी भी राजनीतिक दल की तुलना में पीपीपी ने इसे बहुत महत्व दिया।
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