100 साल पहले यानी ठीक 1922-23 में कैलाश मेले के दौरान मंदिर परिसर के अलावा अकबर के मकबरे, सिकंदरा में भोले के भक्तों का हुजूम पहुंचता था। सावन के तीसरे सोमवार को कैलाश मेले में सिकंदरा स्मारक में दुकानें लगती थीं। 

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100 साल पहले यानी ठीक 1922-23 में कैलाश मेले के दौरान मंदिर परिसर के अलावा अकबर के मकबरे, सिकंदरा में भोले के भक्तों का हुजूम पहुंचता था। सावन के तीसरे सोमवार को कैलाश मेले में सिकंदरा स्मारक में दुकानें लगती थीं। 

ताजनगरी आगरा में सावन के तीसरे सोमवार को कैलाश मंदिर पर ऐतिहासिक लक्खी मेला लगेगा। सरकारी कार्यालयों की छुट्टी रहेगी। भोले के लाखों भक्तों का सैलाब यमुना किनारे कैलाश मंदिर पर पहुंचेगा। 100 साल पहले यानी ठीक 1922-23 में कैलाश मेले के दौरान मंदिर परिसर के अलावा अकबर के मकबरे, सिकंदरा में भोले के भक्तों का हुजूम पहुंचता था। सिकंदरा स्मारक के बाहर और अंदर मुख्य दरवाजे से पांच मंजिला मुख्य मकबरे तक दुकानें सजती थीं। मुख्य दरवाजे के अंदर और बाहर लोग झूलों और चाट-पकौड़ी का आनंद लिया करते थे। सिकंदरा स्मारक के अंदर पैर रखने की जगह तक नहीं बचती थी।


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