भाजपा नेतृत्व आगामी लोकसभा चुनाव की तैयारियों में अपने राज्यसभा के प्रमुख नेताओं का ज्यादा से ज्यादा उपयोग करेगी। इन नेताओं को संगठनात्मक दायित्वों के साथ चुनाव क्षेत्रों के प्रबंधन की जिम्मेदारी भी दी जाएगी। पार्टी नेतृत्व ने हाल में राज्यसभा सांसद आधा दर्जन प्रमुख नेताओं को राज्यों के संगठन प्रभारियों का दायित्व सौंपा है।

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भाजपा नेतृत्व आगामी लोकसभा चुनाव की तैयारियों में अपने राज्यसभा के प्रमुख नेताओं का ज्यादा से ज्यादा उपयोग करेगी। इन नेताओं को संगठनात्मक दायित्वों के साथ चुनाव क्षेत्रों के प्रबंधन की जिम्मेदारी भी दी जाएगी। पार्टी नेतृत्व ने हाल में राज्यसभा सांसद आधा दर्जन प्रमुख नेताओं को राज्यों के संगठन प्रभारियों का दायित्व सौंपा है।

भाजपा नेतृत्व पहले भी अपनी चुनावी रणनीति में चुनाव प्रबंधन, प्रचार, प्रसार आदि से जुड़ी गतिविधियों में राज्यसभा सांसदों को बड़े पैमाने पर जोड़ती रही है। अब जबकि पार्टी के पास 90 से ज्यादा राज्यसभा सांसद हैं तब इन नेताओं को विभिन्न संगठन एवं चुनावी प्रबंधन का काम दिया जा रहा है। दरअसल, इन नेताओं पर अपने संसदीय क्षेत्र की भी जिम्मेदारी नहीं होती है और चुनाव लड़ने का तनाव भी नहीं, ऐसे में वह ज्यादा समय दे सकते हैं। हालांकि, लोकसभा सांसद प्रमुख नेताओं को भी संगठन और चुनाव प्रबंधन में जोड़ा जाएगा। चूंकि वह खुद चुनाव मैदान में उतरेंगे, इसलिए उन पर बोझ कम करने के लिए राज्यसभा सांसदों का ज्यादा उपयोग किया जाएगा।


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