रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) भविष्य के हथियारों पर भी कार्य कर रहा है। इसी सिलसिले में उसने इलेक्ट्रो मैग्नेटिक रेलगन बनाने के लिए भी शुरुआती तैयारियां आरंभ कर दी है। यह ऐसी तोप है जो 200 किलोमीटर दूरी तक मार कर सकती है। यह थल, नभ और जल सेना तीनों के लिए भविष्य का एक घातक हथियार है।

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रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) भविष्य के हथियारों पर भी कार्य कर रहा है। इसी सिलसिले में उसने इलेक्ट्रो मैग्नेटिक रेलगन बनाने के लिए भी शुरुआती तैयारियां आरंभ कर दी है। यह ऐसी तोप है जो 200 किलोमीटर दूरी तक मार कर सकती है। यह थल, नभ और जल सेना तीनों के लिए भविष्य का एक घातक हथियार है।

इसमें गोला दागने के लिए बारूद नहीं, बल्कि इलेक्ट्रो मैग्नेटिक फील्ड का इस्तेमाल किया जाता है। डीआरडीओ ने टेक्नोलॉजी फोकस जर्नल में विस्तृत रिपोर्ट रेलगन को लेकर प्रकाशित की है। पुणे स्थित उसकी प्रयोगशाला आरमेंट रिसर्च एंड डेवलपमेंट स्टबलिसमेंट (एआरडीई) में इस पर काम शुरू किया गया है।


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