यात्रा वृतांत- जगन्नाथपुरी
लेखक - संजय दुबे
यात्राये, आपको परिवर्तन से रूबरू कराने का माध्यम है।आप तन से स्थान बदलते है तो मन भी बदलता है। मस्तिष्क को नए तरीके से काम करने का अवसर मिलता है और आपको अनुभव मिलते है। यात्रा ,जीवन को सकारात्मक ऊर्जा देने का तरीका भी है। आखिर जीवन भी तो यात्रा ही है। यात्राये, आपको प्रकृति के साथ साथ स्थान और व्यकियो से भी मिलाती है। इनसे आप सीखते भी है।
ऐसे ही उद्देश्य को लेकर हमने भी यू ही होली पर्व को मनाने के लिए जगन्नाथपुरी स्थान तय कर लिया। धाम भी और होली का धमाधम भी।
रायपुर से 653 किलोमीटर की यात्रा याने 12 घण्टे तक मार्ग की यात्रा। ण सुबह 5 बजे आसमान अंधेरे के आगोश में सोया हुआ था तारो के मद्धिम रोशनी किये हुए। जैसे जैसे हमारी कार किलोमीटर के पत्थरों और साइनेज बोर्ड को पार करते जा रही है उजाले ने अपना साम्राज्य बनाने की प्रक्रिया शुरू करने लगी। अंधेरे में छुपे घर, पेड़ कम दूरी से दिखने लगें थे याने अंधेरा कभी भी कायम नही रह सकता है। बहरहाल सिंदूरी सूरज आसमान पर आया तो साथ साथ पेड़ो के पीछे से लुका छिपी खेलने लगा। पलाश के पेड़ों पर आच्छादित फूलों की खूबसूरती निखरने लगी थी। होली औऱ साहित्य में टेसू के रंग खूब बिखरे है। ऐसे ही जगह पर सुबह की पहली चाय नसीब हो जाये तो क्या बात हो।संजय बिहारी ढाबा दिख ही गया। लुत्फ की चाय भी मिल गयी। साढ़े आठ बजे छत्तीसगढ़ की सीमा को पार कर हाइवे से जब सोहेला के रास्ते पुरी जाने के लिए मुड़े तब कार की गति कम हो गयी। संस्कृति का फर्क दिखने लगा था। दुकानों के बोर्ड पर उड़िया भाषा मे लिखा एक भी शब्द पल्ले नही पड़ रहा था। सब जलेबी । खैर हमे क्या, कौन सा हमे उड़ीसा रहना है। आगे के सफर में यात्रा बढ़ते गई।जंगल, हरे भरे खेत,पहाड़ो के बीच के रास्तो से हम गुजरते गए। जंगल के बीचोबीच एक होटल में रुके। 5 स्टार होटल बताया गया था लेकिन स्टार ही नही था। अत्यंत साधारण। सभी से आग्रह है कि उड़ीसा में किसी होटल में लंच- डिनर लेने का पूर्व कार्यक्रम न बनाये बल्कि घर से ही खाना ले कर जाए। उड़ीसा के होटलों में चाय भी नही मिलता है। हम 12 घण्टे की यात्रा पूरी कर शाम 5 बजे जगन्नाथपुरी पहुँच कर पूर्व से बुकिंग किये हुए होटल में जमा हो गए।
थोड़ी देर बाद हम चार धाम में एक धाम के जगन्नाथ पुरी के विशाल मंदिर जहां जगन्नाथ(जिन्हें पहले नीलमाधव कहा जाता था), बलभद्र, सुभद्रा और सुदर्शन स्थापित है। दुनियां में भाई बहन का ये इकलौता मंदिर है। मंदिर की जानकारी के लिए हमने एक गाइड ले लिया। सभी से आग्रह है कि जब कभी बड़े स्थानों की यात्रा करे तो जानकारी के लिए गाइड जरूर रखे इससे बहुत सी सुविधा और जानकारी मिल जाती है। गाइड के चलते आपके सामानों की सुरक्षा भी हो जाती है। महज 500 रुपये का पारिश्रमिक होता है यहां। बाकी जगह आप भुगतान की जानकारी लेकर गाइड रखे।गाइड ने न केवल जानकारी दी बल्कि सुविधापूर्वक दर्शन भी कराया। मुझे इस स्थान पर सबसे आकर्षक कार्य मंदिर के शीर्ष पर झंडा चढ़ाने का काम लगा। 224 फ़ीट ऊंचे जगह पर चढ़ना वह भी बिना किसी सहयोग के कठिन काम है लेकिन आस्था इसे सहज बना देती है। ये काम रोज होता है। एक दिन की चूक भी मंदिर के पट 12 साल बंद करा देगा।इस धाम में प्रसाद के रूप में चाँवल का चढ़ावा चढ़ता है।हमें भोग मिला जिसका आनंद अलग ही था। मंदिर के मुख्य द्वार पर
देवी स्थापित है उनके द्वारा प्रवेश के मामले में विवाद का किस्सा भी सुना। पति को घर मे न घुसने और थोड़े समय के बाद जबर्दस्ती घुसने मि कहानी से समझ आया कि भगवान भी पति पत्नी बने तो विवाद उनके बीच भी हुआ। हमने दो दिन में तीन बार दर्शन किये। महाप्रसाद यहां की खूबी है। आप अपनो को इसे भेंट मुलाकात के रूप दे सकते है। दूसरे दिन सुबह कई रंग के गुलाल लेकर भगवान में साथ होली खेलने पहुँच गए। उनको समर्पित कर प्राँगण में, समुद्र में, होटल में गुलाल से सरोबार हुए/किये
जगन्नाथपुरी में मंदिर के बाद अगर कोई जगह है तो समुंदर है, यहाँ से वहां तक,साफ सुथरा किनारा, दूसरे दिन अलसुबह हम समुद्र में थे। 3 घण्टे तक समुद्र से हम रूबरू होते रहे। अथाह पानी मे आते जाते छोटे बड़े लहरों ने हमे खूब डुबाया, धकेला, फेंका, कई बार नमकीन पानी मुँह में भी गया लेकिन पानी के आनंद का अलग ही मज़ा है। ट्यूब में बैठ जाये तो औऱ भी आनंद। समुंदर से लौट कर भूख का इंतजामात भी जरूरी था सो ये काम भी किये। शाम में भी समुद्र ने आमंत्रित कर लिया तो पूर्णिमा के चांद के साथ बैठ गए। मैगी औऱ छोटे समोसे (जिसे सिंघाड़ा कहा जाता है) का आनंद ले लिए। शाम के समय पुरी के समुद्र तट पर भीड़ का रैला दिखता है यदि आप थोड़ा आगे चले जाएं तो कम भीड़ मिलती है जिससे आपको समुद्र देखने और नहाने का आनंद ज्यादा मिलेगा।
जहां तक होटल में रुकने का मामला है तो समुद्र के सामने के बजाय समुद्र के सामने के पीछे वाले कतार में बहुत से होटल है जिनमे आप सुविधा पूर्ण ढंग से रुक सकते है। यहां जगन्नाथ ट्रस्ट के द्वारा बनाये गए सर्वसुविधायुक्त आवास है। सिर्फ 1400 रुपये में । होटल से भी भव्य। ऑनलाइन सुविधा है।www.staypurijavannatha.in या 067522-22686 मोबाइल नंबर पर सम्पर्क कर सकते है।
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