08 Mar 2024

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मैं अपने गाँव की सरपंच थीं। मैं और मेरे पति गाँव को सुधारने में सक्रिय थे। हम दोनों को विकास कार्य के लिए धमकियों का सामना करना पड़ता था। विकास कार्यों को रोकने के लिए हम पर दबाव बनाया जाता था। हमारी स्कूल और आंगनबाड़ी को बंद करने को कहा गया। मुझे इस बात की बहुत पीड़ा थी। मैंने नक्सलियों का विरोध करने का निर्णय लिया। अपने समाज की समस्याओं को अंतरमन से समझकर मुझे स्वयं को सशक्त बनाने की जरूरत महसूस हुई और मैं फाइटर बन गई। आज मैं अपने पति से भी ज्यादा शक्तिशाली महसूस करती हूं। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय से बात करते हुए बस्तर फाइटर नारायणपुर की पोकेश्वरी सलाम ने अपने जीवन की आपबीती मुख्यमंत्री को बतायी।  मुख्यमंत्री ने शीतल के साहस को किया सलाम

08 Mar 2024 02:02PM,
by: Tikendra Sinha
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अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय दंतेवाड़ा जिले के जावंगा पहुंचे। यहां उन्होंने डीआरजी, सीआरपीएफ और नारायणपुर के बस्तर फाईटर्स की सैनिक महिलाओं से संवाद किया। संवाद के दौरान मुख्यमंत्री से बस्तर फाइटर्स की दल कमान्डर सुनैना पटेल ने अपना अनुभव साझा करते हुए बताया कि उन्हांेने होम गार्ड के रूप में अपने कैरियर की शुरुआत की थी। वहां से लेकर अब तक उन्हें लगातार प्रशंसा और प्रोत्साहन मिला। एक कमांडों के रूप में उन्होंने अपनी गर्भावस्था के 7वें महीने तक जंगल गश्त की। उन्हें इसकी प्रशंसा केन्द्रीय मंत्री श्रीमती स्मृति इरानी से भी मिली। नक्सली मुठभेड़ में उनकी भूमिका के परिणाम स्वरूप उन्हें आउट ऑफ टर्न पदोन्नति भी मिली है।

08 Mar 2024 02:01PM,
by: Tikendra Sinha
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 8मार्च कहने के लिए एक दिन है लेकिन ये दिन दुनियां की आधी आबादी की चेतना के जीत की एक तारीख है। सौ साल से भी अधिक समय पहले दुनियां के एक हिस्से में महिलाओ ने सरकार को चुनने के लिए मतदान का अधिकार की मांग की थी। 1910 में जर्मनी की एक्टिविस्ट क्लारा जेटकीन के प्रयासों से विश्व महिला दिवस की शुरुवात हुई थी। 114सालो में आधी आबादी ने जितनी तेजी से गति पकड़ी है अगर उसे देखे तो ये लगता है कि आने वाले समय में वे बराबरी की बात को छोड़ दे तो वे आगे निकलने का सामर्थ्य रखती है। पश्चिमी देशों में स्त्रियों के अधिकार के मायने हमारे देश की तुलना में जुदा जुदा है। वे पहनावा, रहन सहन , कामकाज के साथ विवाह,परिवार के आकार और मतभेद होने की स्थिति में स्वतंत्र जीवन जीने का भी अधिकार रख रही है। उनके यहां स्त्रियां अगर देह व्यापार जैसे कार्य में भी संलिप्त है तो समाज में उनके सम्मान में कमी नहीं है। आधी आबादी और पूरा जश्न

08 Mar 2024 11:37AM,
by: Babuaa Desk