08 Oct 2021

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 साठ के दशक से लेकर कोरोना काल के पहले तक अगर गुरुवार(नब्बे के दशक तक) और अब शुक्रवार का कोई मतलब हुआ करता है तो सिनेमाघरों में लगने वाली फिल्में ही हुआ करती थी। शुक्रवार से लेकर रविवार तक ये माना जाता है कि केंद्रीय सरकार के सरकारी कर्मचारी अधिकृत रुप से अवकाश पर होते है। शनिवार से विद्यालय महाविद्यालय बन्द होने के बाद मनोरंजन के नाम पर फिल्मो में विचरना अनिवार्यता ही रही थी। कोरोना ने अब संदर्भ बदल दिए है, ओटीटी आने के बाद अब फिल्में भी 3×6 इंच के पर्दे में सिमट गया है। एक जमाने मे गानों के लिए जाने वाला दर्शक वर्ग खत्म होते जा रहा है।ढाई से लेकर तीन घण्टे वाली फिल्में अब नही बनती है। लेकिन आजादी के बाद ऐसा दौर आया था।श्वेत श्याम फिल्मों के दौर में अनेक नायक आये। पारिवारिक नायक रहे, प्रेमी नायक रहे लेकिन इन नायकों में एक नायक ऐसा भी आया जिसका चेहरा नायक सा नही था। सरकारी सेवा में थे वो भी पुलिस विभाग में, ऐसे ही सरकारी कर्मचारी का रुतबा आम आदमी से अलग होता है तिस पर पुलिस विभाग याने वर्दी का रौब, इसी वर्दी से निकल कर आये थे - 'राजकुमार' यहां के हम है 'राजकुमार'

08 Oct 2021 10:56AM,
by: Naveen kumar sahu