08 Oct 2022

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हिंदी फिल्मों में दर्शक केवल देखने नहीं सुनने भी जाता है - इस बात को ध्यान में रखकर पटकथा में संवाद की अहम भूमिका होती है। कहानी के पात्रों को भूमिका देने के साथ साथ उनके संवाद लिखने का काम अलग होता है। नायकों को ध्यान में रख कर ही संवाद लिखे जाते है, पर जब फिल्मों में राजकुमार रहते थे तो उनके लिए संवाद भी दमदार लिखने का दबाव पटकथा लेखकों को रहा करता था। यहां तक कि फिल्म में राजकुमार का नाम और पद का भी विशेष ख्याल रखना पड़ता था। तिरंगा फिल्म में वे सेना के अधिकारी बने थे पहले नाम पढ़ ले - सूर्यदेव सिंह, पद ब्रिगेडियर- थल सेना के मेजर जनरल से नीचे का पद जिसके मातहत 3000-5000 सैनिक ब्रिग्रेड में रहते है।"सूर्या" फिल्म में नाम- राजपाल चौहान, पद- कलेक्टर। बुलन्दी नाम प्रो सतीश कुमार( तब प्रो सतीश धवन, अंतरिक्ष विज्ञान के प्रमुख थे)। इन चंद उदाहरणों से अंदाज़ा लगाया जा सकता है कि राजकुमार की हैसियत फिल्म इंडस्ट्री में क्या थी। यहां के हम है राजकुमार

08 Oct 2022 06:34AM,
by: Babuaa Desk