09 Aug 2024

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पश्चिम बंगाल के पूर्व मुख्यमंत्री बुद्धदेव भट्टाचार्य के पार्थिव शरीर को शोध कार्य के लिए राज्य सरकार द्वारा संचालित एनआरएस मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल को सौंप दिया जाएगा। यह जानकारी माकपा के एक अधिकारी ने दी। भट्टाचार्य के पार्थिव शरीर को माकपा के लाल झंडे में लपेटकर दक्षिण कोलकाता के पाम एवेन्यू स्थित उनके दो कमरों वाले साधारण आवास से पीस वर्ल्ड शवगृह ले जाया गया। इससे पहले राज्यपाल सीवी आनंद बोस, मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, वाम मोर्चा के अध्यक्ष बिमान बोस, माकपा के राज्य सचिव मोहम्मद सलीम भट्टाचार्य के आवास पर पहुंचे। बुद्धदेव भट्टाचार्य का पार्थिव शरीर अस्पताल को दान किया जाएगा

09 Aug 2024 08:32AM,
by: Babuaa Desk
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   142करोड़ आबादी वाला देश भारत, जनसंख्या के मामले में गोल्ड मेडलिस्ट है।जनसंख्या नीति न होने के कारण देश बेलगाम रूप से ऐसा रिकार्ड बना रहा है जिसे सालो तक होने वाले जनसंख्या ओलंपिक खेलों में कोई देश नहीं तोड़ पाएगा। हम चाहते है कि गोल्ड मेडल मिले लेकिन जनसंख्या के खेल में जरूर चाहेंगे कि इसमें हम फिसड्डी साबित हो। 1896से 2024के अंतराल में 33ओलंपिक खेल आयोजित हुए है( द्वितीय विश्व युद्ध अवधि 1940 और 1948को छोड़कर)। भारत ने सही मायने में 1928से ओलंपिक खेलों मे भाग लेना शुरू किया यद्यपि 1900के पेरिस ओलंपिक खेलों में भारत में जन्मे नॉर्मन पिचार्ड ने दो सिल्वर मेडल जीता था। सही मायने में देश के रूप में जीतने का क्रम 1928 में हॉकी के गोल्ड मेडल जीतने के साथ ही शुरू हुआ। 1952 के ओलंपिक खेलो में भारत पहली बार हॉकी छोड़ किसी अन्य स्पर्धा(कुश्ती) में के डी जाधव ने ब्रॉन्ज मेडल जीता था।1952 के बाद आबादी बढ़ती गई लेकिन मेडल लाने का जिम्मा केवल हॉकी टीम का था। देश में कोई खेल नीति नहीं थी। हमारे राजनीतिज्ञों ने देश दुनिया के संविधान को छांट छांट कर कर ले आए। नकल करने के मामले में बराबरी पर रहे लेकिन "खेलोगे कूदोगे होगे खराब" का आदर्श लिए बढ़ते रहे।हॉकी में एस्ट्रोट्रफ आया तो हॉकी में भी पिछड़ गए। 1980का मास्को ओलंपिक आखरी गोल्ड मेडल का आयोजन था। 1984से लेकर1992के तीन ओलंपिक में भारत पदक तालिका में नही था। 1996से व्यक्तिगत रूप से पदक जीतने की शुरुवात हुई । लिएंडर पेस ने ब्रॉन्ज मेडल जीतकर के डी जाधव परंपरा को आगे बढ़ाया। महिलाओ में कर्रनम मल्लेश्वरी ने 2000ओलंपिक में ब्रॉन्ज मेडल जीतकर महिला सशक्तिकरण को दिखाया।इसके बाद आयोजित किसी भी ओलंपिक में भारत बेरंग नही लौटा। 2004में राज्यवर्धन सिंह राठौर ने निशानेबाजी में सिल्वर मेडल जीता।2008 में अभिनव बिंद्रा ने अभिनव परंपरा की शुरुवात करते हुए निशानेबाजी में गोल्ड मेडल साधा। इसी साल पहलवान सुशील कुमार और मुक्केबाज विजेंदर कुमार ने मुक्केबाजी में ब्रॉन्ज मेडल जीतकर 1952के बाद देश को दो से अधिक मेडल दिलाया।2012का ओलंपिक भारत के लिए उपलब्धि का ओलंपिक खेल था। पहलवाल सुशील कुमार ने लगातार दो ओलंपिक खेलों में व्यक्तिगत रूप से दो मेडल जीतने वाले पहले भारतीय खिलाड़ी बने। सुशील कुमार और विजय कुमार ने सिल्वर मेडल जीता। साइना नेहवाल (बैडमिंटन), मेरी कॉम (मुक्केबाजी), योगेश्वर दत्त (कुश्ती),गगन नारंग (शूटिंग), ओलंपिक का सफर एक सिल्वर चार ब्रॉन्ज में खत्म !

09 Aug 2024 08:32AM,
by: Babuaa Desk