19 Jun 2024

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मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार बजट सत्र के दौरान छत्तीसगढ़ राज्य को वर्ष 2024 तक विकसित राज्य बनाने की घोषणा को अमल में लाने के लिए इसकी रूपरेखा एक विजन डाक्यूमेंट के रूप में तैयार करने में जुट गयी है। राज्य नीति आयोग द्वारा छत्तीसगढ़ विजन डाक्यूमेंट के लिए विधायकगणों, जनप्रतिनिधियों, शिक्षाविदों, विद्यार्थियों, व्यापारियों एवं उद्यमियों सहित जनसामान्य से सुझाव लिए जाने का सिलसिला शुरू कर दिया गया है। मोर सपना मोर विकसित छत्तीसगढ़ नामक पोर्टल के माध्यम से भी सुझाव प्राप्त किए जा रहे है। इस एप का ज्यादा से ज्यादा उपयोग लोग सुझाव देने के लिए कर सके इसके लिए  इसका अधिकाधिक प्रचार विभिन्न माध्यमों से किया जा रहा है। 

19 Jun 2024 06:34PM,
by: Tikendra Sinha
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मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की सरकार एग्रीस्टेक योजना पर कार्य कर रही है। छत्तीसगढ़ में अब फसल आच्छादन का डिजिटल सर्वे होगा। प्रथम चरण में खरीफ 2024 के लिए महासमुंद, धमतरी और कवर्धा जिलों का चयन किया गया है। इन जिलों में भूमि रिफेरेसिंग का कार्य किया जा रहा है। सर्वे में किसानों की फसलों की सभी जानकारियां भारत सरकार के एग्रीस्टेक पोर्टल में दर्ज होंगी। किसानों को फसल उत्पादकता के लिए जरूरी इनपुट जैसे फसल ऋण, विशेषज्ञो की सलाह से लेकर बाजार उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी। 
एग्रीस्टेक पोर्टल का उद्देश्य कृषि उत्पादकों (किसानों) और नीति निर्माताओं-केंद्र सरकार और राज्य सरकार को एक डिजिटल छतरी के नीचे लाना है।  एग्रीस्टेक पोर्टल के जरिए किसानों को केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं से लाभान्वित किया जाएगा। इसके साथ ही किसानों को आवश्यकतानुसार बैंक ऋण लेने की भी सुविधा मिलेगी। इस पोर्टल के माध्यम से किसानों को फसल के अनुसार खाद और पानी की मात्रा की भी जानकारी मिलेगी। किसानों को फसल और उत्पादन के लिए आवश्यक बाज़ार उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी। 
    एग्रीस्टेक योजना में किसानों को भूमि फसल, मृदा स्वास्थ्य, मौसम की स्थिति के आधार पर नियमित रूप से सामयिक सलाह फसल की बोआई और उत्पादन के लिए विश्वसनीय डाटा के अलावा सूखा, बाढ़, खराब उत्पादन जैसे जोखिम से निपटने की तैयारी के बारे में जानकारी मिलेगी। एग्रीस्टेक पोर्टल में किसानों का पंजीयन होने के बाद उन्हें एक फार्म तथा फार्मर आईडी दी जाएगी तथा जियो रेफरेन्सड मैप को किसान आईडी से लिंक किया जाएगा। किसानों द्वारा भूमि में लगाई गई फसल का डिजिटल सर्वेक्षण किया जाएगा। 
डिजिटल फसल सर्वे खरीफ 2024 में धमतरी, महासमुंद, कवर्धा जिले में किया जाएगा। इन जिलों में डिजिटल फसल सर्वेक्षण के लिए जियो रिफेरेसिंग का कार्य अंतिम चरण में है। महासमुंद जिले के 1150 गांवों में से 973, धमतरी जिले में 613 ग्राम में से 304, कवर्धा जिले में 1012 ग्रामों में से 809 ग्रामों में जियो रिफ्रेंसिंग का कार्य पूर्ण कर लिया गया है। इन जिलों में 2 करोड़ 2 लाख 90 हजार से अधिक फार्म आईडी बनाए गए हैं। राज्य स्तर पर एग्रीस्टेक योजना के संचालन के लिए मुख्य सचिव की अध्यक्षता में संचालन समिति और क्रियान्वयन के लिए संचालक कृषि की अध्यक्षता में क्रियान्वयन समिति गठित की गई है। एग्रीस्टेक योजना: किसानों को मिलेगी ऋण से लेकर सभी जरूरी सहायता

19 Jun 2024 06:34PM,
by: Tikendra Sinha
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मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय सरकार द्वारा छत्तीसगढ़ के कैडस्ट्रल नक्शों का जियो रिफ्रेंसिंग एवं डिजिटाइजेशन परियोजना भी संचालित की जा रही है। जिसमें राज्य का सम्पूर्ण हिस्सा सर्वेक्षित हो जाएगा और एक डिजिटल डेटा बेस तैयार किया जा सकेगा। यह जियो रिफ्रेंसिंग कार्य डिफरेंशियल ग्लोबल पोजिशनिंग सिस्टम (डीजीपीएस) सर्वेक्षण से किया जा कर सैटेलाईट ईमेज से किया जा रहा है।
राज्य में संचालित की जा रही कैडस्ट्रल नक्शों का जियो रिफ्रेंसिंग एवं डिजिटाईजेशन परियोजना के अंतर्गत 20 हजार से अधिक ग्राम पंचायतों में भूमि का सर्वेक्षण का काम होगा। अब तक महासमुंद, धमतरी, कबीरधाम, मुंगेली, बिलासपुर, जांजगीर-चांपा, सक्ती, बलौदाबाजार, कोरबा सहित 9 जिलों के 4375 गांवों की भूमि का जियो रिफ्रेंसिंग का कार्य पूर्ण किया जा चुका है। इस परियोजना में छत्तीसगढ़ में भू-सर्वे को त्रुटि रहित बनाने के लिए अत्याधुनिक तकनीक जिओ रिफ्रेंसिंग का इस्तेमाल किया जा रहा है। इस तकनीक में छोटी से छोटी भूमि का लॉन्गीट्यूड और एटीट्यूड के माध्यम से वास्तविक भूमि चिन्हांकित करना आसान हो जाएगा।
मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने इस नई तकनीक के इस्तेमाल को अपनी मंजूरी दी गई है, इसके लिए बजट में प्रावधान भी कर दिया गया है। अधिकारियों ने बताया कि जियो रिफ्रेंसिंग एवं डिजिटाईजेशन परियोजना में राज्य का सम्पूर्ण हिस्से का सर्वेक्षण किया जाएगा। प्रत्येक ग्राम की सीमा का सेटेलाईट इमेज पर त्रुटि रहित चिन्हांकन होगा। इससे प्रत्येक ग्राम का राजस्व अभिलेख की उपलब्धता सुनिश्चित होगी। मोबाइल एप के माध्यम से डिजिटल क्रॉप सर्वेक्षण किया जाना संभव हो सकेगा। 
परियोजना के माध्यम से भू-सर्वे का कार्य त्रुटि रहित होने के साथ-साथ बंदोबस्त त्रुटि सुधार प्रकरणों का तेजी से निराकण किया जा सकेगा। सीमांकन कार्य में भूमि संबंधी विवादों का सही-सही निराकरण किया जा सकेगा। जियो-रिफेरेसिंग कार्य से वर्तमान में उपलब्ध पटवारी नक्शा तथा स्थल पर भिन्नता का आंकलन कर उनका निराकरण भी किया जा सकेगा। सीमांकन-नामांतरण, बटवारा संबंधी न्यायालयीन प्रकरणों में कमी आएगी। प्रधानमंत्री गति सक्ती योजना के क्रियान्वयन में भी तेजी आएगी। कृषि, पंचायत एवं ग्रामीण विकास, स्कूल शिक्षा, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण, लोक निर्माण और जल संसाधन आदि विभागों की परि-सम्पत्तियां को आसानी से चिन्हांकित किया जा सकेगा।
भू-सर्वे सत्यापन की प्रक्रिया के लिए राजस्व विभाग द्वारा विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किया जा रहा है, कलेक्टर को सर्वेक्षण अधिकारी के रूप में अधिकृत किया गया है। सर्वेक्षण अधिकारी के मार्ग-दर्शन में उप-सर्वेक्षण अधिकारी अनुविभागीय अधिकारी राजस्व, सहायक सर्वेक्षण अधिकारी तहसीलदार कार्य करेंगे। राजस्व निरीक्षक एवं पटवारी कलेक्टर के परिवेक्षण में तथा एसडीएम, तहसीलदार के निर्देश में जारी प्रपत्र अनुसार सत्यापन कर नक्शे एवं स्थल के मध्य की भिन्नता को दूर करेंगे।
पटवारियों द्वारा ऐसे 15-20 अनडिस्पियूड ग्राउंउ कंट्रोल प्वाइंटस को मिलान किया जाएगा जो खसरा मैप और सेटेलाईट इमेज में समान रूप से मिलते हैं। जियो-रिफ्रेंसिंग खसरा नक्शों में खसरा नंबर मूल पटवारी नक्शों से मिलान किया जाएगा, प्रत्येक खसरा के रिकॉर्ड एरिया एवं जीआईएस एरिया का मिलान किया जाएगा, ग्राम के सीमा से लगे अन्य ग्रामों की सीमा की ओवरलेपिंग एवं गेप की जांच एवं निराकरण किया जाएगा।

19 Jun 2024 04:06PM,
by: Tikendra Sinha
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राज्य नीति आयोग द्वारा अमृत काल विजन डॉक्यूमेंट तैयार करने हेतु ‘‘गुणवत्तायुक्त शिक्षा’’ विषय पर गठित वर्किंग ग्रुप की द्वितीय बैठक राज्य नीति आयोग के उपाध्यक्ष श्री अजय सिंह की अध्यक्षता में आज यहां नीति भवन नवा रायपुर में आयोजित की गई। बैठक में वर्किंग ग्रुप के सदस्यों द्वारा महत्वपूर्ण सुझाव दिए गए। नीति आयोग के सदस्य सचिव श्री अनूप श्रीवास्तव और सदस्य डॉ. के.सुब्रमण्यम ने राज्य नीति आयोग द्वारा अमृतकालः छत्तीसगढ़ विजन@ 2047 विजन डॉक्यूमेंट तैयार करने हेतु गठित कार्य समूह को ‘छत्तीसगढ़ सभी के लिए विश्व स्तरीय समुदाय आधारित शिक्षा और उच्च मांग कौशल प्रदान करेगा’ थीम के संबंध में विस्तार से जानकारी दी। बैठक में गुणवत्ता युक्त शिक्षा के लिए निर्धारित प्रमुख लक्ष्यों, प्रमुख चुनौतियों तथा विभागीय विजन संबंधी प्रस्तुतिकरण दिया गया। बैठक में मुख्यमंत्री के सलाहकार डॉ. धीरेन्द्र तिवारी भी मौजूद थे। गुणवत्तायुक्त शिक्षा वर्किंग ग्रुप की द्वितीय बैठक सम्पन्न

19 Jun 2024 03:37PM,
by: Tikendra Sinha