20 May 2023

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राजनीति में संवैधानिक व्यवस्था से परे भी अपनी अलग व्यवस्था बनाने का शगल है। इसे संतुलन का सिद्धांत कहा जाता है। दल के भीतर चाहे जातीय संतुलन हो या बाहुबल का संतुलन हो या फिर व्यक्तित्व का संतुलन हो, बराबर करना पड़ता है। इसे भीतर ही भीतर पनप सकने वाले असंतोष को ढाँकने की सफल कोशिश भी कहा जा सकता है। कर्नाटक अभी सुर्खियों का राज्य है कारण भी है । कांग्रेस ने शानदार प्रदर्शन करते हुए भाजपा को चारों खाने चित्त की है। अप्रत्यक्ष रूप से बजरंग बली भी भाजपा के लिए सहयोगी न हो पाए। वैसे भी दक्षिण के राज्यो में उनके अपने इष्ट है जो हिंदी भाषी राज्यो से अलग है। कर्नाटक इसलिये भी चर्चित है कि पहली बार बंद कमरे के भीतर के समझौते के रूप में ढाई ढाई साल का फार्मूला सार्वजनिक हुआ है। काश ये साहस साढ़े चार साल पहले दिखा होता तो मध्यप्रदेश में अभी सिंधिया, राजस्थान में सचिन पायलट औऱ छत्तीसगढ़ में टी एस सिंहदेव के नाम के सामने मुख्यमंत्री लिखा होता। खैर, यदि ये सब होता तो काहे ज्योतिरादित्य सिंधिया पलायन करते, सचिन पायलट रैली निकालते औऱ टी एस सिंहदेव आलाकमान के भरोसे रहते।  उप" कृते" मुख्यमंत्री

20 May 2023 05:24AM,
by: Babuaa Desk