22 Sep 2023

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न्यायालयो के निर्णयों का हमेशा सम्मान होना चाहिए।अगर निर्णय के प्रति आक्षेप हो तो अपील किये जाने का प्रावधान सुरक्षित रहता है। कुछ मुद्दे ऐसे होते है जिनका सरोकार न्यायालय के निर्णय तक सीमित न होकर सार्वजनिक हो जाता है ऐसा ही एक विषय है:- व्यावसायिक जगत में प्रचार,इसका अपना बाजार है औऱ बहुत ही बड़ा बाजार हैं अरबो का बाजार है, गलाकाट स्पर्धा में हर व्यक्ति/ फर्म अपने उत्पाद को बेहतर बताने के लिए भले बुरे तरीके अपना रहे है। इसी तरीके में एक तरीका है नामवर फ़िल्म कलाकारों का उपयोग/ दुरुपयोग। हाल ही में अनिल कुमार ने न्यायालय का शरण लिया और बताया कि उनके नाम, फ़ोटो सहित उनके संवाद अभिव्यक्ति की उनके विधिक अनुमति के बगैर दुरुपयोग किया जा रहा है।दिल्ली हाइकोर्ट से आदेश भी आ गया है कि अनिल कपूर के नाम, फ़ोटो, उनके फिल्मों में बोले गए संवाद पर उनकी अनुमति के बगैर विज्ञापन जगत में उपयोग नही किया जा सकता है। अनिल कपूर के कुछ फिल्मी नाम जैसे मि . इंडिया, लखन,मजनूं, नायक सहित "झकास" जैसे शब्द को अनिल कपूर के" पर्सनालिटी राइट्स" माना गया है। न्यायालय ने किसी व्यक्ति के व्यक्तित्व से जुड़े अधिकार पर सीमा पार खलल पर रोक लगाने को उचित समझा है। क्या "झकास" शब्द का पेटेंट अनिल कपूर ने कराया है..!

22 Sep 2023 02:06AM,
by: Babuaa Desk