रायपुर

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बेंगलुरु का रामेश्वरम कैफे जहां इस महीने की शुरुआत में विस्फोट हुआ था, आज फिर से खुलने जा रहा है। रामेश्वरम कैफे के मालिक राघवेंद्र राव ने बताया कि आउटलेट पर सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सभी एहतियाती कदम उठाए गए हैं। उन्होंने कहा, ''हम अपने दिन की शुरुआत राष्ट्रगान से करते हैं l यह हमारा मंत्र है l हमने सभी सीसीटीवी फुटेज और जानकारी दे दी है।' हम उनका सहयोग कर रहे हैं l हम इतनी जल्दी कैफे फिर से खोलने में मदद करने के लिए सरकार के बहुत आभारी हैं। एनआईए जल्द ही अपराधी को हमारे सामने लाएगी. हमने दोबारा खोलने से पहले सभी सावधानियां बरती हैं।” बेंगलुरु का रामेश्वरम कैफे आज से जनता के लिए फिर से खुल जाएगा

09 Mar 2024 06:48AM,
by: Babuaa Desk
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 हर व्यक्ति गायक नहीं होता है लेकिन कुछ गीत ऐसे होते है जो उसे गुनगुनाने पर मजबूर कर देते है। अधिकांश व्यक्ति फिल्मी गानों को जल्दी ही गाने की क्षमता रखता है क्योंकि सुर ताल सभी सधे रहते है। श्रोता को गाना ,गाने वालो के नाम, फिल्म का नाम और नायक नायिका का नाम पता होता है। ज्यादा हो गया तो संगीतकार का नाम जान जाते है लेकिन गाना लिखने वाला अज्ञात रह जाता है। दरअसल गीतकार, कच्चा माल बेचने वाला होता है, जिसके माल की कई प्रोसेसिंग होती है,जैसे के सुर लगाना,संगीत देना,फिल्मांकन करना, इतना होने के बाद गाना बाजार में आता है। इस कारण शब्दो का ये किसान अज्ञात ही रह जाता है।गीतकार का नाम याद रहे ये कोशिश होनी चाहिए ,यही सोच कर साहिर लुधियानवी को याद आज किया जा रहा है, नियम से उनको 8मार्च को विशेष रूप से याद किया जाता है क्योंकि इसी दिन साहिर ने अब्दुल हई फजल मोहम्मद के रूप में जन्म लिया था। साहिर लुधियानवी - जिनके लिखे गीत हम गुनगुनाते है

09 Mar 2024 06:48AM,
by: Babuaa Desk
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 8मार्च कहने के लिए एक दिन है लेकिन ये दिन दुनियां की आधी आबादी की चेतना के जीत की एक तारीख है। सौ साल से भी अधिक समय पहले दुनियां के एक हिस्से में महिलाओ ने सरकार को चुनने के लिए मतदान का अधिकार की मांग की थी। 1910 में जर्मनी की एक्टिविस्ट क्लारा जेटकीन के प्रयासों से विश्व महिला दिवस की शुरुवात हुई थी। 114सालो में आधी आबादी ने जितनी तेजी से गति पकड़ी है अगर उसे देखे तो ये लगता है कि आने वाले समय में वे बराबरी की बात को छोड़ दे तो वे आगे निकलने का सामर्थ्य रखती है। पश्चिमी देशों में स्त्रियों के अधिकार के मायने हमारे देश की तुलना में जुदा जुदा है। वे पहनावा, रहन सहन , कामकाज के साथ विवाह,परिवार के आकार और मतभेद होने की स्थिति में स्वतंत्र जीवन जीने का भी अधिकार रख रही है। उनके यहां स्त्रियां अगर देह व्यापार जैसे कार्य में भी संलिप्त है तो समाज में उनके सम्मान में कमी नहीं है। आधी आबादी और पूरा जश्न

08 Mar 2024 11:37AM,
by: Babuaa Desk