03 May 2021

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रायपुर : मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने छत्तीसगढ़ राज्य में अन्य राज्यों से आने वाले लोगों, प्रवासी श्रमिकों को अनिवार्य रूप से क्वारेंटिंन सेंटर में ठहराने और उनका करोना टेस्ट कराने के निर्देश दिए हैं । मुख्यमंत्री श्री बघेल ने कहा है कि राज्य के कई ग्रामीण इलाकों में अन्य राज्यों से आने वाले प्रवासी श्रमिकों एवं लोगों के संक्रमित होने की जानकारी मिल रही है । राज्य में कोरोना संक्रमण को रोकने के लिए यह जरूरी है , कि अन्य राज्यों से आने वाले लोगों को गांव, घर- परिवार के बीच जाने देने के बजाय उन्हें गांव के बाहर स्थापित क्वॉरेंटीन सेंटर में कुछ दिनों के लिए एहतियात के तौर पर अनिवार्य रूप से ठहराया जाए और उनका कोरोना टेस्ट भी कराया जाए। कोरोना टेस्ट की रिपोर्ट नेगेटिव होने पर ही उन्हें गांव एवं घर परिवार में जाने की अनुमति दी जाए। यह इसलिए जरूरी है कि थोड़ी सी सावधानी बरतकर हम गांव और ग्रामीणों को संक्रमित होने से बचा सकते हैं । 

03 May 2021 02:56PM,
by: Thaneshwar sahu
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 देखा जाए तो आम  भारतीय व्यक्ति जो 1932 के सालो  से लेकर आने वाले सालो में जन्म लिया है  उसके जीवन मे फिल्मो के गाने की महक है। अनपढ़ व्यक्ति भी किसी गाने को गुनगुनाने की हैसियत  रखता है।  सुर बैठे या न बैठे,वाद्य यंत्र बजे न बजे, आवाज सहगल, मुकेश,रफी,किशोर,अर्जित,के के  या फिर लता,आशा,हेमलता,शारदा, अल्का  सुनिधि,श्रेया य जैसी हो या न हो गीत गाते है। हमे रेडियो के उद्घोषक सहित टेलीविजन में गीत दिखाने -सुनानेवाले  फिल्म का नाम, गायक गायिका, गीतकार,संगीतकार का नाम दिखाते है। हम अभिनय करने वालो को याद रखते है, गाने वालो को याद रखते है, कुछ हद तक संगीतकारों को भी याद रखते है लेकिन जो व्यक्ति एक  गीत को जन्म देता है, वह गुमनाम ही रह जाता है।कहा जाता है  कि गीतकार केवल आटा गुथनेवाला होता है।उसे रोटी का आकार संगीतकार,गायक  गायिका  औऱ अभिनय करनेवाले अभिनेता,अभिनेत्री सहित डायरेक्टर सहित कैमरामैन का होता है।यही वजह है कि हम गीतकार को याद नही रखते या बाकी लोगो की मेहनत इतनी प्रखर हो जाती है कि गीतकार के गुमनाम होने के अलावा कोई विकल्प शेष नही रह जाता है। मुझे लगता है कि गीतकार को भी नाम के अलावा प्रसिद्धि मिलना चाहिये।  सालो से गाने सुनता आ रहा हूं शायद 1967 से गाने समझ मे आने लगे थे। लेकिन गानों का सिलसिला 1932 से शुरू हो चला है सो कोशिश कर रहा हूं कि कानो में घुलने वाले शब्दकारो से खुद को और आपको भी  मिलाते चलूं। आपको याद दिलाते चलूँ कि हर रविवार को अपने लेख के माध्यम से देश के  उन गीतकारों  को जिनके गीतों ने कभी खुशी के बयार को फैलाया तो किसी के गीत ने रुलाया, किसी के गीत ने  नाचने पर मजबूर किया तो किसी के गीत ने आपको गर्व से भर दिया।  छोटी सी बात:-  भारत  की पहली बोलती फिल्म आलमआरा के पहले गीत- दे दे खुदा के नाम पर देदे गर ताकत है देने की के गीतकार का नाम किसी को पता नही है ।  कलम के लयनुमा पुरौधा

03 May 2021 02:25PM,
by: Babuaa Desk
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कोलकाता : बंगाल विधानसभा चुनाव 2021 में तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) की प्रचंड जीत के बाद पार्टी सुप्रीमो व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने सोमवार को नवनिर्वाचित विधायकों के साथ बैठक कीं। तृणमूल मुख्यालय में आयोजित बैठक के दौरान पार्टी के नवनिर्वाचित विधायकों ने ममता को सर्वसम्मति से विधायक दल का नेता चुना। इधर, ममता शाम को राज्यपाल से मिलने पहुंची हैं। बैठक के बाद संवाददाता सम्मेलन में पार्टी के महासचिव व राज्य के शिक्षा मंत्री पार्थ चटर्जी ने बताया कि बैठक में निर्णय हुआ है कि आगामी पांच मई, बुधवार को शपथ ग्रहण समारोह होगा। ममता बनर्जी लगातार तीसरी बार मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगी। मुख्यमंत्री के अलावा कैबिनेट के अन्य सदस्य भी इस दिन शपथ लेंगे। इसके साथ ही छह मई से विधानसभा का भी सत्र आयोजित किया जाएगा। इसमें सभी नवनिर्वाचित विधायकों को शपथ दिलाई जाएगी

03 May 2021 01:56PM,
by: Thaneshwar sahu
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भोपाल ; कोरोना महामारी के बीच भी पत्रकार अपने धर्म से पीछे नहीं हटे है। देश में जब पहली बार लॉकडाउन लगा था उस समय पूरा देश घरों में सुरक्षित बैठा था और पत्रकार संकट के बीच फील्ड में अपनी रिपोर्टिग कर रहे थे। ऐसे में अब मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने सभी मान्यता प्राप्त पत्रकारों को फ्रंटलाइन वर्कर घोषित किया है। सोमवार को कहा कि प्रदेश के सभी मान्यता प्राप्त पत्रकार अग्रिम पंक्ति के कर्मियो की श्रेणी में शामिल किए गए हैं। उन्होंने कहा कि पत्रकार कोविड काल में अपनी जान जोखिम में डालकर अपने कर्तव्यों का निर्वाह कर रहे हैं। यह जानकारी शिवराजसिंह चौहान ने ट्वीट कर दी थी। हॉस्पिटल से लेकर शमशान घाट तक पत्रकारों ने सच्चाई को जन-जन तक पहुंचाया है। और आज भी कई राज्यों की सरकारों ने लॉकडाउन लगा रखा है तो बाहर की सच्चाई को जनता से अवगत करा रहे है। भारत में कोरोना ने अपना आतंक मचा रखा है। हालात बेकाबू हो रहे है। आज भी पत्रकार अपना कर्तव्य निभाते हुए सच्चाई को जनता तक पहुंचा रहे है। कोरोना काल में अनेक पत्रकार अपनी जान से हाथ धो बैठे है। कई पत्रकार रिपोर्टिग करते-करते कोरोना संक्रमित भी हो चुके है।

03 May 2021 01:26PM,
by: Thaneshwar sahu