03 May 2021

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 रायपुर, मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने केन्द्रीय वित्त मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण को पत्र लिखकर प्रदेश में वर्तमान में 9 अप्रैल से 6 मई की सुबह तक कंटैनमेंट जोन घोषित होने के कारण राज्य के लघु और मध्यम व्यवसायियों की परेशानियों को देखते हुए उन्हें वांछित राहत प्रदान करने का अनुरोध किया है। श्री बघेल ने छत्तीसगढ़ चैम्बर ऑफ कामर्स एण्ड इण्डट्रीज के अनुरोध पर केन्द्र सरकार से मांग की है कि व्यवसायियों द्वारा विभिन्न प्रकार की विवरणियों को प्रस्तुत करने की अप्रैल एवं मई माह की तिथियों को दो माह के लिए बढ़ाया जाए साथ ही व्यवसाय संचालन हेतु लिए गए ऋण के मूलधन और ब्याज की किश्तों के भुगतान की समय-सीमा को कम से कम 3 माह की स्थगन अवधि प्रदान करने पर विचार किया जाए

03 May 2021 12:49PM,
by: Thaneshwar sahu
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  देखा जाए तो आम भारतीय व्यक्ति जो 1932 के सालो से लेकर आने वाले सालो में जन्म लिया है उसके जीवन मे फिल्मो के गाने की महक है। अनपढ़ व्यक्ति भी किसी गाने को गुनगुनाने की हैसियत रखता है। सुर बैठे या न बैठे,वाद्य यंत्र बजे न बजे, आवाज सहगल, मुकेश,रफी,किशोर,अर्जित,के के या फिर लता, आशा, हेमलता, शारदा, अल्का सुनिधि,श्रेया य जैसी हो या न हो गीत गाते है। हमे रेडियो के उद्घोषक सहित टेलीविजन में गीत दिखाने -सुनानेवाले फिल्म का नाम, गायक गायिका, गीतकार,संगीतकार का नाम दिखाते है। हम अभिनय करने वालो को याद रखते है, गाने वालो को याद रखते है, कुछ हद तक संगीतकारों को भी याद रखते है लेकिन जो व्यक्ति एक गीत को जन्म देता है, वह गुमनाम ही रह जाता है।कहा जाता है कि गीतकार केवल आटा गुथनेवाला होता है।उसे रोटी का आकार संगीतकार,गायक गायिका औऱ अभिनय करनेवाले अभिनेता,अभिनेत्री सहित डायरेक्टर सहित कैमरामैन का होता है।यही वजह है कि हम गीतकार को याद नही रखते या बाकी लोगो की मेहनत इतनी प्रखर हो जाती है कि गीतकार के गुमनाम होने के अलावा कोई विकल्प शेष नही रह जाता है। मुझे लगता है कि गीतकार को भी नाम के अलावा प्रसिद्धि मिलना चाहिये। कलम के लयनुमा पुरौधा

03 May 2021 11:30AM,
by: Thaneshwar sahu