07 Dec 2020

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छत्तीसगढ़ में पहली बार वर्चुअल मैराथन दौड़ का आयोजन 13 दिसंबर को किया जा रहा है। इस दौड़ में शामिल होने के लिए चार दिसंबर से पंजीयन शुरू हो गया है। इसके लिए सभी वर्ग के लोगों में अच्छा-खासा उत्साह देखने को मिल रहा है। इसमें पंजीयन के शुरू होते ही 24 घंटों के भीतर 19 हजार लोगों ने ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन कराया है। इस वर्चुअल मैराथन में अब तक जांजगीर चांपा जिले से 1584, बालोद से 767, बलौदाबाजार-भाटापारा से 829, बलरामपुर- रामानुजगंज से 222, बस्तर में 554,बेमेतरा में 483, बीजापुर में 462 तथा बिलासपुर में 903 लोगों ने रजिस्ट्रेशन कराया है। इसी तरह दक्षिण बस्तर दंतेवाड़ा से 210,धमतरी से 622, दुर्ग से 1946, गरियाबंद से 394, गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही से 152, तथा जशपुर से 525 लोगों ने रजिस्ट्रेशन कराया है। इसके अलावा उत्तर बस्तर कांकेर से 257,कवर्धा से 577, कोण्डागांव से 167,कोरबा से 843, कोरिया से 548, महासमुंद से 999, मुंगेली से 433 तथा नारायणपुर से 124 लोगों ने रजिस्ट्रेशन कराया है। इसी तरह रायगढ़ से 1018,रायपुर से 1609, राजनांदगांव से 1079,सुकमा से 215, सूरजपुर से 713 और सरगुजा से 364 लोगों ने ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन कराया है। यह करना होगा... वर्चुअल मैराथन दौड़ के लिए प्रतिभागी कहीं भी समूह के रूप में एकत्रित नहीं होंगे।प्रतिभागी घर, उद्यान, मैदान, सड़क या अन्य किसी सुरक्षित स्थान पर सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते दौड़ेंगे और दौड़ेंते हुए कुछ सेकेण्ड का वीडियो, फोटो 13 दिसम्बर को सबेरे 6 बजे से 11 बजे तक हैशटैग के साथ फेसबुक व ट्विटर पर अपलोड कर सकेंगे। खेल एवं युवा कल्याण विभाग द्वारा प्रदेशवासियों से कोविड- 19 के नियमों का पालन करते हुए वर्चुअल मैराथन दौड़ के सफल आयोजन में सहभागी बनने की अपील की गई है। पहली बार होने ला रही वर्चुअल मैराथन दौड़

07 Dec 2020 12:09PM,
by: Imran Khan
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इस बार प्रभु यीशु मसीह के जन्म का उत्सव कोरोना के साये में मनाया जा रहा है। अमूमन क्रिसमस से माहभर पहले ही गड़रिए घर-घर जाकर यीशु के जन्म का संदेश देने लगते हैं,लेकिन इस बार ऐसा नहीं हो सका। कैरोल सिंगिंग ग्रुप भी इस बार नहीं निकलेंगे। कैंप फायर भी कुछ बड़ी जगहों पर ही होंगे।।इसके अलावा 25 दिसंबर को चर्च जाने वाले हर व्यक्ति का रिकॉर्ड रखने उनका नाम रजिस्टर में दर्ज करने का फैसला भी लिया गया है। इस क्रिसमस 2 हजार साल पुरानी संस्कृति के दर्शन नहीं होंगे। जीसस के जन्म का संदेश तरानों के जरिए देने वाले कैरोल सिंगिंग ग्रुप इस बार नहीं निकलेंगे। नए साल पर होने वाले प्रीतिभोज और वनभोज यानी पिकनिक भी नहीं होंगे। इससे पहले लॉक डाउन की वजह से दुनियाभर में प्रभु यीशु के बलिदान का पर्व गुड-फ्राइडे व पुनरुत्थान पर्व ईस्टर भी नहीं मनाया जा सका।जिस तरह प्रभु यीशु की कबर पर उनके चेले व माता व बहनें तीसरे दिन सुगंधित द्रव्य व फूल चढ़ाने गए थे उसकी याद में हर साल मसीही कब्रिस्तानों में पुरखों की समाधि पर लोग पुष्पांजलि देने नहीं जा सके थे। कोरोना का असर:इस बार प्रभु यीशु मसीह के जन्म उत्सव पर भी

07 Dec 2020 12:09PM,
by: Imran Khan
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जगदलपुर :कलेक्टर एवं जिला रेडक्रॉस सोसायटी अध्यक्ष रजत बंसल के पहल पर बेगलुरू कर्नाटक से गुमशुदा 80 वर्षीय बुजुर्ग अपने पोते के पास पहंुचेगी। लगभग एक वर्ष से कर्नाटक बेगलुरू से बुजुर्ग माता घर से निकल कर कहीं चली गई। गुमशुदा नानी की तलाश परिजन कर रहे थे। बुजुर्ग माता लाॅकडाऊन शुरू होने के दौरान मार्च माह में लवारिस स्थिति बस्तर जिला के तोकापाल पहुंच गयी। जहां कलेक्टर बंसल के निर्देश पर बुजुर्ग माता को तत्कालीन एसडीएम तोकापाल माधुरी सोम द्वारा धरमपुरा स्थित आस्था निकुंज रेडक्रॉस वृद्धाश्रम में शिफ्ट करवाया गया था। इसी दौरान अध्यक्ष रेडक्रॉस सोसायटी बंसल ने उपाध्यक्ष अलेक्जेंडर एम. चेरियन को निर्देशित किया कि बुजुर्ग माता के घर का पता कर उनको घर पहुंचाना है। चंूकि जब शिफ्ट करवाया गया था तब से वो किसी से बात नहीं करती, रोते रहती थी। धीरे धीरे वृद्धाश्रम के अन्य माताओ प्रबंचक ठाकुर जी एवं अन्य से मिलने लगी। फिर कन्नड़ में अलेक्जेंडर चेरियन से बात करने में पता चला कि वो बेंगलुरू कर्नाटक की है और उनके सामान को खोजा गया तो एक आधा मिटा हुआ नम्बर मिला जिसे जोड़कर काल करने पर एक दो नम्बर में बात हुआ और उनको माताजी के बारे में बताया गया। जब एक नंबर में बात हुआ तो डरते हुए एक व्यक्ति ने कहा कि उनकी नानी लगभग एक साल से गुम हो गयी हैं। उनको वीडियो काॅल कर माता जी को दिखाया गया, तब उन्होनें माता जी को पहचान लिया। फिर उनसे पूछा गया तो व्यक्ति ने अपना परिचय के. सेन्दील, माता जी के पोता के रूप में बताया। उनसे कन्नड़ और हिन्दी में बात कर बताया गया कि वे अपनी माता को ले जाना चाहते हैं तो उसकी व्यवस्था कलेक्टर एवं अध्यक्ष के द्वारा कर दिया जाएगा। सेन्दील के. ने बताया कि वे कूली का काम करते हैं उनकी आर्थिक स्थिति ठीक नहीं हैं , इसलिए ले जाने में तकलीफ हैं। सेन्दील कुमार की आर्थिक स्थिति कमजोर होने की जानकारी मिलते ही कलेक्टर श्री रजत बंसल ने उपाध्यक्ष अलेक्जेंडर एम. चेरियन को निर्देश दिया कि माता जी को उनके घर तक निःशुल्क सकुशल पहंुचाया जाए। अब माता जी को बेंगलुरू भेजने की तैयारी हो रही है। उल्लेखनीय है कि लाॅकडाऊन में कलेक्टर एवं अध्यक्ष रजत बंसल के मानवियता के कारण गुमशुदा को घर तक पहुचाने का ये तीसरा प्रकरण हैं। कर्नाटक के ही शिवप्रकाश जो लगभग दस वर्ष से लापता थे उनको भी लाकडाऊन के दौरान कोरनटाईन वार्ड में तीन महीने तक रखकर रेडक्रॉस द्वारा घर का पता खोजा गया था और कर्नाटक मे उनके घर निजी बस में भेजा गया था।

07 Dec 2020 12:09PM,
by: Thaneshwar sahu
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कवर्धा :अगर आप अपनी फैमली के साथ छुट्टियों में सैर-सपाटे के शौकिन है या देश के प्रमुख प्रर्यटन स्थल जैसे दार्जलिंग, शिमला, कुल्लु-मनाली या फिर उंटी के शौक रखते है तो आपको उन भी पर्यटन स्थलों की अनुभूति छत्तीसगढ़ में मिल सकती है। छत्तीसगढ़ के मैकल पर्वत श्रृंख्ला की चोटी चिल्फी के सरोदा दादर में शिमला जैसे ठंड की अनुभूति और आनंद मिल सकता है। दरअसल संपूर्ण कबीरधाम की वादियां मैकल पर्वल की विशाल श्रृंख्ला की तलहटी पर बसा हुआ है। इस हिस्से को सतपुड़ा के घने जंगल का क्षेत्र भी कहा जाता है। यह तस्वीर उसी विशाल मैकल पर्वत श्रृंख्ला की एक हिस्से की है, जहां पर्यटन संभावना को आकार दिया गया है।

07 Dec 2020 12:09PM,
by: Thaneshwar sahu
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नई दिल्‍ली : पिछले 11 दिनों से कृषि विधेयक के खिलाफ जारी किसानों के आंदोलन का सोमवार को 12वां दिन है। यह आंदोलन व्यापक रूप लेता जा रहा है। इस क्रम में मंगलवार, 8 दिसंबर को किसानों ने भारत बंद का ऐलान किया है जिसे विपक्षी पार्टियों का पूरा समर्थन प्राप्‍त है। इसमें उत्‍तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री और बसमा सुप्रीमो मायावती का नाम भी शामिल है। इसके अलावा दिल्ली की सीमाओं पर आंदोलन करने वाले किसानों से दिल्ली के मुख्‍यमंत्री अरविंद केजरीवाल भी आज मुलाकात करेंगे। वहीं राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े भारतीय किसान संघ ने आंदोलनकारी किसानों द्वारा बुलाए गए 8 दिसंबर को भारत बंद से दूरी बना ली है। इसके पीछे भारतीय किसान संघ की ओर से इसमें शामिल राजनीतिक पार्टियों को कारण बताया गया है। भारतीय किसान संघ का कहना है कि किसान संगठनों को लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात सरकार के सामने रखनी चाहिए। किसानों को विपक्षी दलों का साथ, केजरीवाल पहुंचे सिंघु बॉर्डर

07 Dec 2020 12:01PM,
by: Thaneshwar sahu