15 Sep 2022

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कल हिंदी दिवस था, थोक में हिंदी को अपनाने, बढ़ाने,की बात हो रही थी। आक्रोश भी दिखा कि आजादी के अमृत उत्सव के ७५ साल बीत जाने के बाद भी १४ सितम्बर १९४९ को संविधान में घोषित राज की भाषा आज भी राज भाषा नही बन पाई है। एक देश जिसके बहुतेरे राज्यो में हिंदी बोली लिखी पढ़ी जाती हैं और बहुतेरे राज्यो में बोली नही जाती है, पढ़ी नही जाती है वहां भाषाई बैर भी है बावजूद इसके हिंदी की पैठ बढ़ी है। १९९० के पहले के काल को याद करे तो देश मे रोजगार नही के बराबर था। केवल सरकारी नौकरी हुआ करती थी न तो तकनीकी महाविद्यालय की संख्या थी और न ही भर्ती। मैं तब के प्रधानमंत्री नरसिम्हा राव और वित्तमंत्री मनमोहन सिंह का आभार मानता हूँ जिन्होंने देश में बहुराष्ट्रीय कंपनियों के आगमन के द्वार खोले। यही से निजी संस्थानों के आगमन की शुरूवात हुई और कमोबेश आंग्ल भाषा मे शिक्षा का भी आगमन महानगरों से निकल कर गांव गांव में हुआ।  बीते ३२ साल और नई हिंदी

15 Sep 2022 09:44AM,
by: Babuaa Desk