27 Jan 2021
दिल्ली में ट्रैक्टर रैली के दौरान मंगलवार को हुई हिंसा के बाद पुलिस सख्त हो गई है। उपद्रव करने के मामले में पुलिस ने अब तक 35 एफआईआर दर्ज की है। उपद्रवियों के खिलाफ दर्ज की गई एफआईआर में किसान नेता राकेश टिकैत, बलजीत सिंह रजवाल, दर्शन पाल, राजिंदर सिंह, बूटा सिंह बुर्जगिल और जोगिंदर उमराह, योगेंद्र यादव और गौतम सिंह चढूनी सरवन सिंह पंधेर और सतनाम पन्नू समेत कई लोगों के नाम प्रमुख रुप से शामिल हैं। इन सभी किसान नेताओं पर नियम व शर्तें के उल्लंघन का आरोप है।
27 Jan 2021 10:22AM,by: Thaneshwar sahu
WHO के कार्यकारी बोर्ड की बैठक के 148 वें सत्र को संबोधित करते हुए, केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन ने कहा कि दुनिया COVID-19 महामारी को समाप्त करने की कगार पर है। हालांकि, उन्होंने कहा कि "कहानी यहां समाप्त नहीं हुई है, इसलिए हमें महामारी को समाप्त करने के लिए अपनी प्रतिबद्धता को फिर से दोगुना करना चाहिए"।
27 Jan 2021 09:05AM,by: Babuaa Desk
आंध्र प्रदेश के चित्तूर जिले में अंधविश्वास के कारण अपनी ही बेटी की हत्या करने वाले माता-पिता को मदनपल्ले पुलिस ने मंगलवार को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने माता-पिता पर हत्या का मामला दर्ज किया है। इसमें अचरज की बात यह है कि बेटियों की हत्या करने वाले ये उच्च शिक्षित माता-पिता का यह मानना था कि कलयुग समाप्त होकर सतयुग आने वाला है और दैवीय शक्ति से वे कुछ घंटों में फिर से जिंदा हो जाएंगी।
27 Jan 2021 08:31AM,by: Thaneshwar sahu
दिल्ली में मंगलवार को किसानों की ट्रैक्टर परेड के दौरान लाल किले की प्राचीर पर प्रदर्शकारियों द्वारा झंडा फहराने का मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। मामले को लेकर एक कानून के छात्र ने भारत के मुख्य न्यायाधीश एसए बोबडे को पत्र लिखकर लाल किले पर किसी दूसरे समुदाय का झंडा फहराने वाले असामाजिक तत्वों के खिलाफ स्वतः संज्ञान लेने मांग की है। मुंबई विश्वविद्यालय के कानून के छात्र आशीष राय द्वारा लिखे गए पत्र में कहा गया है कि 26 जनवरी 2021 को किसानों के एक समूह द्वारा आयोजित ट्रैक्टर रैली में कुछ असामाजिक तत्वों द्वारा आतंक फैलाया गया।
27 Jan 2021 08:30AM,by: Thaneshwar sahu
मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा कि प्रदेश के बाहर ‘छत्तीसगढ़ माॅडल’ की खूब चर्चा होती है। जगजाहिर है कि हमें विराट जनादेश तो मिला लेकिन हमारी सरकार को विरासत में खाली-खजाना मिला था। लोगों को न्याय का इंतजार था, इसलिए तात्कालिक राहत के साथ दूरगामी विकास के कदम भी उठाने थे। हमने इस स्थिति का मुकाबला गांधी-नेहरू-शास्त्री-पटेल-आजाद-डाॅ. अम्बेडकर जैसे मनीषियों की वैचारिक विरासत से किया। सादगी, सरलता, जन विश्वास और राज्य के संसाधनों के सम्मान और वेल्यू एडीशन को मूलमंत्र बनाया। किसानों-कर्मवीरों-वन आश्रितों-स्थानीय कलाओं के लिए सरकारी खजाना खोल दिया। कमजोर माली हालत वाले लोगों के लिए राहत का पिटारा खोल दिया। इस तरह गांव से लेकर शहर तक आर्थिक गतिविधियों का थमा हुआ पहिया घूमने लगा। गांवों-घरों में पहुंचे पैसों से बाजारों की रौनक लौटी तो इसकी चमक भी अन्य प्रदेशों ने देखी। इस दौर में हमारी माताओं-बहनों ने जिस तरह धीरज, साहस और रचनाशीलता के साथ गौठानों में, स्व-सहायता समूह में, बिहान समूहों में गोबर की कलाकृतियां, मास्क, सेनेटाइजर तथा अन्य वस्तुएं बनाकर योगदान दिया, उसकी जितनी भी तारीफ की जाए वह कम है। कोरोना महामारी और लाॅकडाउन के दौर में भी छत्तीसगढ़ में उत्पादन और विकास का पहिया चलता रहा। *
27 Jan 2021 08:03AM,by: Imran Khan
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