21 Oct 2023

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कभी कभी अपने बीते हुए अतीत की ओर रुख कर लेता हूं और यादों के गलियारे में खुद को पाता हूं उम्र 17जी18साल की रही होगी। फिल्मे देखना आसान नहीं हुआ करता था पैसे की तंगी जो हुआ करती थी। महीने में दो फिल्मे देखना नसीब हो गया तो क्या कहने होते थे। ऐसे में एक ही विकल्प शेष बचता था ।सुबह अखबार में सारे थियेटर में लगी फिल्मों के बारे में पढ़ो और जानो।  कितने शो चल रही है, कौन सा सप्ताह चल रहा है।कलाकार कौन कौन है। अगली आने वाली फिल्म कौन सी है।आमतौर पर गुरुवार को  नई फिल्मे लगा करती थी। अब  शुक्रवार को लगने लगी हैं  क्योंकि सप्ताह 5दिन का हो गया है।पुरानी फिल्मे भी दोबारा लगती थी।  लिखा होता था जनता की "भारी मांग पर "।ये कौतूहल होता कि आखिर जनता जाकर थिएटर वाले को बताती कैसे है कि उन्हें ये फिल्म देखना है। याद आ गया मुझे गुजरा जमाना

21 Oct 2023 03:51PM,
by: Babuaa Desk