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राजीव गांधी स्टडी सर्कल और कनोडिया गर्ल्स कालेज के संयुक्त तत्वावधान में कनोडिया कालेज सभागार में हुये "स्वतंत्रता पूर्व और बाद की भारतीय राजनीति में महिलाओं की भूमिका" विषयक सेमिनार में वक्ताओं ने कहा कि महात्मा गांधी के युग की जनाधारवादी, नैतिक एवं सत्याग्रह आधारित संघर्षात्मक एवं रचनात्मक जनान्दोलन की राजनीति ने देश की राजनीति में महिलाओं की व्यापक सक्रिय भागीदारी का द्वार खोला और उत्कर्ष प्रदान किया। आजादी के बाद भी अनेक महिलाओं के राष्ट्रीय- अंतरराष्ट्रीय महत्वयुक्त नेतृत्व को उभार मिला, लेकिन महिला राजनीतिक भागीदारी के जितना ज्यादा विकास की उम्मीद नये संवैधानिक गणतंत्र में की गई थी, उतने अपेक्षित परिणाम नहीं मिले। इस दिशा में आन्दोलनों के सहारे ही और बेहतर परिणाम संभव हैं, जिसकी लोकतांत्रिक प्रवृतियों को सुनियोजित ढंग से दबाया एवं कुचला जा रहा है।

21 Apr 2022 07:30AM,
by: Naveen kumar sahu