महासमुंद

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  ओलम्पिक खेलों में भाग लेने वाले हर देश के खिलाड़ी k पहला उद्देश्य देश और खुद के लिए पदक जीतना होता है। हर देश और खिलाड़ी पदक जीत नही सकते है।ओलंपिक खेल का आदर्श है -जीतो तो गर्व नहीं हारो तो शर्म नहीं। जीत हार से ऊपर प्रतिद्वंदिता है और खेल भावना है। भारत के सभी राजनैतिक दलों को ये सीखने की आदत डालने की सख्त जरूरत है। सत्ता में है तो सुनना नहीं और विपक्ष में है तो केवल विरोध करना,शर्मनाक है। विनेश फोगाट का उदाहरण सामने है। राजनीति के खिलाड़ी, खेल के मामले में ज्यादातर अंगूठा छाप होते है। सामान्य ज्ञान और विशिष्ट ज्ञान में जमीन आसमान का फर्क होता है। राजनीति से जुड़ाव रखने वाले खेल में मामले में उतने ही अनाड़ी होते है जितना खिलाड़ी, राजनीति के मामले में  पदकों की दौड़ में अमेरिका का प्रभुत्व

14 Aug 2024 06:10AM,
by: Babuaa Desk