किसान आंदोलन पर केंद्र सरकार के " असंवेदनशील' "रवैया अपनाने का आरोप लगाते हुए राकांपा प्रमुख शरद पवार ने गुरुवार को कहा कि अगर किसानों ने प्रदर्शन का शांतिपूर्ण रास्ता छोड़ दिया ,तो देश में बड़ा संकट पैदा हो जाएगा और भाजपा सरकार इसके लिए जिम्मेदार होगी। बहुस्तरीय बैरिकैड और कंटीले तार लगाने तथा सड़कों पर कीलें ठोंके जाने को लेकर उन्होंने सरकार की आलोचना की और दावा किया कि ऐसा तो अंग्रेजों के शासन के दौरान भी नहीं हुआ था। पूर्व केंद्रीय कृषि मंत्री ने आरोप लगाया कि सरकार किसानों के मुद्दे को सुलझाने के प्रति इच्छुक ही नहीं है। पवार ने कहा, वे समस्या को सुलझाना ही नहीं चाहते।मैं चिंतित हूं कि आज जो किसान शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे हैं, अगर वे दूसरे रास्ते पर जाते हैं तो यह एक बड़ा संकट बन जाएगा और भाजपा सरकार को इसकी जिम्मेदारी लेनी होगी।' उन्होंने 10 विपक्षी दलों के सांसदों को गाजीपुर में प्रदर्शनकारी किसानों से मिलने की इजाजत नहीं देने को लेकर भी केंद्र सरकार की आलोचना की। उन्होंने कहा,‘वे (विपक्षी सांसद) महज किसानों का हालचाल जानने के लिए शांतिपूर्ण तरीके से वहां गये थे लेकिन उन्हें रोक दिया गया। यदि लोकतंत्र में ऐसा होगा तो उन्हें (सरकार को) आज या कल इसकी भारी कीमत चुकानी पड़ेगी।
05 Feb 2021 02:41AM,by: Imran Khan
मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा कि प्रदेश के बाहर ‘छत्तीसगढ़ माॅडल’ की खूब चर्चा होती है। जगजाहिर है कि हमें विराट जनादेश तो मिला लेकिन हमारी सरकार को विरासत में खाली-खजाना मिला था। लोगों को न्याय का इंतजार था, इसलिए तात्कालिक राहत के साथ दूरगामी विकास के कदम भी उठाने थे। हमने इस स्थिति का मुकाबला गांधी-नेहरू-शास्त्री-पटेल-आजाद-डाॅ. अम्बेडकर जैसे मनीषियों की वैचारिक विरासत से किया। सादगी, सरलता, जन विश्वास और राज्य के संसाधनों के सम्मान और वेल्यू एडीशन को मूलमंत्र बनाया। किसानों-कर्मवीरों-वन आश्रितों-स्थानीय कलाओं के लिए सरकारी खजाना खोल दिया। कमजोर माली हालत वाले लोगों के लिए राहत का पिटारा खोल दिया। इस तरह गांव से लेकर शहर तक आर्थिक गतिविधियों का थमा हुआ पहिया घूमने लगा। गांवों-घरों में पहुंचे पैसों से बाजारों की रौनक लौटी तो इसकी चमक भी अन्य प्रदेशों ने देखी। इस दौर में हमारी माताओं-बहनों ने जिस तरह धीरज, साहस और रचनाशीलता के साथ गौठानों में, स्व-सहायता समूह में, बिहान समूहों में गोबर की कलाकृतियां, मास्क, सेनेटाइजर तथा अन्य वस्तुएं बनाकर योगदान दिया, उसकी जितनी भी तारीफ की जाए वह कम है। कोरोना महामारी और लाॅकडाउन के दौर में भी छत्तीसगढ़ में उत्पादन और विकास का पहिया चलता रहा। *
27 Jan 2021 08:03AM,by: Imran Khan
मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा कि सेहत के साथ सुपोषण का गहरा नाता होता है। हमने सार्वभौम पीडीएस योजना लागू करके प्रदेश की 97 प्रतिशत आबादी को पोषण सुरक्षा दी है। मुख्यमंत्री सुपोषण योजना से एक वर्ष में 99 हजार बच्चों का कुपोषण मुक्त तथा 20 हजार महिलाओं का एनीमिया मुक्त होना एक बड़ी उपलब्धि है। सामुदायिक भागीदारी और डीएमएफ जैसी निधियों के उपयोग की इसमें बड़ी भूमिका रही है। हमने डीएमएफ के उपयोग के लिए जो नई गाइड लाइन जारी की थी, उससे शिक्षा, पोषण, रोजगार तथा पुनर्वास में जो मदद मिली है, वह भी हमारी सोच और सही दिशा का प्रतीक है।
27 Jan 2021 08:03AM,by: Imran Khan
मुख्यमन्त्री भूपेश बघेल ने कहा कि छत्तीसगढ़ में हमने स्वास्थ्य सुविधाओं के विकास को भी ऐसे अधोसंरचना विकास के रूप में देखा जिसमें पहुंच की भूमिका ज्यादा हो। इस तरह हमने विद्यमान स्वास्थ्य केन्द्रों में ज्यादा अवधि तक कार्य करने, ज्यादा सुविधाएं जुटाने और ज्यादा मरीजों के लिए आवश्यक सुविधाएं मुहैया कराने की रणनीति अपनाई। हमारी इसी तैयारी की वजह से कोरोना संकट के दौरान लोगों को राहत देने और उपचार की व्यवस्था संभव हुई। कोरोना की विशेष जरूरतों को ध्यान में रखते हुए अस्पतालों का उन्नयन और सेवाओं का विस्तार तत्परता से करना संभव हुआ। राज्य की सामाजिक, आर्थिक परिस्थितियों में मरीजों का सही समय पर अस्पताल नहीं पहुंच पाना भी बड़ी समस्या थी, जिसके समाधान के लिए हमने समुदायों और लोगों के घरों तक पहुंचने की रणनीति अपनाई। इस तरह मुख्यमंत्री हाट-बाजार क्लीनिक योजना का विस्तार शहरी स्लम स्वास्थ्य योजना, दाई-दीदी मोबाइल क्लीनिक योजना, मिनीमाता डायग्नोस्टिक सेंटर योजना आदि स्वरूपों में जांच व उपचार की सुविधाएं जन-जन व घर-घर तक पहुंचीं। डाॅ. खूबचंद बघेल स्वास्थ्य योजना तथा मुख्यमंत्री विशेष स्वास्थ्य योजना से स्वास्थ्य सुविधाओं को घर तक पहुंचाने की रणनीति
27 Jan 2021 07:36AM,by: Imran Khan
मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा कि सार्वजनिक धन तथा मरीजों को बीमा योजनाओं के जंजाल से निकालते हुए हमने डाॅ. खूबचंद बघेल स्वास्थ्य योजना तथा मुख्यमंत्री विशेष स्वास्थ्य योजना शुरू की, इस तरह सामान्य बीमारियों से लेकर दुर्लभ बीमारियों तक के निःशुल्क इलाज की व्यवस्था की गई और बहुत से मरीजों को 20 लाख रूपए तक निःशुल्क इलाज की सुविधा से नया जीवन मिला। हमारी इस पहल की सराहना भी राष्ट्रीय स्तर पर हुई है। मलेरिया मुक्त बस्तर अभियान की रणनीतिक सफलता का परिणाम एक वर्ष में 65 प्रतिशत मलेरिया नियंत्रण है। अब इसी प्रकार सघन अभियान से सरगुजा तथा समूचे छत्तीसगढ़ को भी मलेरिया मुक्त बनाया जाएगा। मरीजों को मिला नया जीवन
27 Jan 2021 07:35AM,by: Imran Khan
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