06 Oct 2022

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कल गली, चौराहे सहित मैदानों में लघु आकार से लेकर मध्यम और ऊंचे रावणो का दहन हुआ। कई स्थानों के पूर्ववर्ती रावणो से और ऊंचा रावण स्थापित हुआ। रावण दहन को देखने हर स्थान पर लोग जुटे। बुराई पर अच्छाई की जीत जो होना था। रावण को जलते देखने वाले व्यक्ति में उस क्षण के लिए भगवान राम समाहित हुए होंगे और जैसे ही रावण का ढांचा भरभरा कर गिरा होगा राम अंर्तध्यान हो गए होंगे कदाचित रावण पुनः अपना वजूद बनाकर साथ घर वापस आ गया । हर साल रावणो के दहन के बाद भी राम का रंग क्यो नही चढ़ पा रहा है ? ये प्रश्न मन को कुरेदे हुए था। मन में ये अंतर्द्वंद्व भी घण्टो चलते रहा कि एक व्यक्ति जिसने ब्राह्मण होने के कारण वेद, पुराण को कंठस्थ किया, पुरोहिती का अद्भुद ज्ञानी होने के साथ साथ शिव तांडव का लेखक रहा। राजकीय कुशाग्रता इतनी थी कि राज्य सोने की लंका कहलाती थी, इस व्यक्ति ने ऐसा कौन सा कृत्य किया जिसके चलते ये बुराई का स्थायी ब्रांड बन गया है। इसका दहन कर देने का अर्थ ही बुराई पर अच्छाई की जीत हो जाना माना जा रहा है। एक ही बुराई दिखी रावण के सम्पूर्ण जीवन मे- ये बुराई थी एक स्त्री के अपहरण का। भारतीय दंड संहिता 1860 की धारा 364 में इस अपराध के प्रमाणित होने पर 7 साल की सज़ा का प्रावधान है। अगर आज की स्थिति में रावण ऐसा किया होता तो। हर जगह रावण से बड़े अत्याचारी जिंदा है

06 Oct 2022 04:55AM,
by: Babuaa Desk