सरकार के साथ बातचीत का हिस्सा रहे किसान नेता चंदा सिंह ने कहा कि कृषि कानूनों के खिलाफ हमारा आंदोलन जारी रहेगा। हम सरकार से कुछ तो जरूर वापस लेंगे। चाहे वो बुलेट हो या शांतिपूर्ण समाधान, उन्होंने कहा कि हम बातचीत के लिए फिर आएंगे। वहीं, अखिल भारतीय किसान महासंघ के अध्यक्ष प्रेम सिंह ने कहा कि आज की बैठक अच्छी रही। सरकार के साथ 3 दिसंबर को अगली बैठक के दौरान, हम उन्हें समझाएंगे कि कृषि कानून का कोई भी किसान समर्थन नहीं करता है। हमारा आंदोलन जारी रहेगा। किसान नेताओं ने क्या कहा
01 Dec 2020 06:13PM,by: Imran Khan
लंबे घमासान के बीच केंद्र सरकार और किसानों के बीच कृषि कानूनों पर मंगलवार को बैठक हुई। करीब चार घंटे तक चली ये बैठक बेनतीजा रही। दिल्ली के विज्ञान भवन में हुई इस बातचीत में कोई फैसला नहीं निकलने के बाद अब अगली बैठक 3 दिसंबर को दोपहर 12 बजे होगी। आज की बैठक को कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने अच्छा बताया।उन्होंने कहा कि किसानों के साथ बातचीत अच्छी रही। हमने 3 दिसंबर को फिर से बातचीत करने का फैसला लिया है। नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा कि हम चाहते हैं कि छोटे संगठन बनें। लेकिन किसान नेता की मांग है कि हर किसान से बातचीत होनी चाहिए। कृषि मंत्री ने कहा कि हमें हरेक किसान से बात करने में कोई परेशानी नहीं है। नरेंद्र सिंह तोमर ने साथ ही किसानों से आंदोलन खत्म करने की मांग की। आंदोलन खत्म करें किसान: कृषि मंत्री
01 Dec 2020 06:13PM,by: Imran Khan
सूत्रों के मुताबिक, बैठक में एक किसान संगठन के प्रतिनिधि ने कहा कि किसान कृषि कानूनों के खिलाफ सड़कों पर हैं और उन्होंने मांग किया कि सरकार को इसे वापस लेने पर विचार करना चाहिए। कृषि मंत्री नरेंद्र तोमर ने किसानों से बैठक में कहा कि 4 से 5 नाम अपने संगठन से दीजिए। एक समिति बना देते हैं जिसमे सरकार के लोग भी होंगे,कृषि एक्सपर्ट भी होंगे, नए कृषि कानून पर चर्चा करेंगे। लेकिन किसान संगठनों ने सरकार के इस प्रस्ताव को ठुकरा दिया है। बैठक में कृषि मंत्री ने क्या बोला
01 Dec 2020 06:13PM,by: Imran Khan
राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी के नेता हनुमान बेनीवाल ने कहा है कि मैंने केंद्र के कृषि कानूनों का विरोध किया है और आज मैंने अमित शाह को एक पत्र लिखा है कि अगर काले कानूनों को रद्द नहीं किया जाता है, तो हम एनडीए को अपना समर्थन जारी रखने के बारे में सोचेंगे। केंद्र कृषि कानूनों पर करे विचार- हनुमान बेनीवाल
01 Dec 2020 03:43AM,by: Imran Khan
केंद्र के कृषि कानूनों के खिलाफ किसान दिल्ली बॉर्डर पर सोमवार को लगातार 60 वे दिन भी जमे रहे। दिल्ली में एंट्री के तीन रास्तों पर सैकड़ों किसान डेरा डालकर बैठे हैं और दिल्ली के जंतर-मंतर पर धरना देने पर अड़े हुए हैं. सरकार ने जिस बुराड़ी मैदान को किसानों के लिए आरक्षित किया था वो इन किसानों को ओपन जेल जैसा लगने लगा है और जो किसान वहां पहुंचे थे वो वापस लौट रहे हैं। ी अब किसानों ने चेतावनी दी है कि अगर उनकी बात नहीं सुनी गई तो दिल्ली को पड़ोसी राज्यों से कनेक्ट करने वाली सभी सड़कों को बंद कर दिया जाएगा। इस बीच, किसान आंदोलन के दौरान सिंधु बॉर्डर पर हुए बवाल को लेकर दिल्ली पुलिस ने दंगा करने और सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने समेत अन्य धाराओं में एफआईआर दर्ज की है।घंणंम्मम् अलीपुर पुलिस स्टेशन में ये एफआईआर दर्ज हुई है। यह एफआईआर अज्ञात लोगों के खिलाफ दर्ज की गई है।
01 Dec 2020 02:59AM,by: Imran Khan
किसानों के "दिल्ली चलो" आंदोलन का आज 5वां दिन है।नए कृषि क़ानूनों के ख़िलाफ़ दिल्ली-हरियाणा के सिंघु बॉर्डर पर किसानों का विरोध प्रदर्शन जारी है। वहीं दिल्ली-यूपी के गाज़िपुर-गाज़ियबाद बॉर्डर पर भी सुरक्षा व्यवस्था के बीच किसान प्रदर्शन जारी रखे हुए हैं। रविवार को प्रदर्शनकारी किसानों ने कहा था कि वो सरकार के साथ बातचीत करने के लिए तैयार हैं, लेकिन कोई भी शर्त नहीं मानेंगे. इनमें सिंघु और टीकरी बॉर्डर से दिल्ली के बुराड़ी मैदान में जाने जैसी शर्तें शामिल हैं। दरअसल गृह मंत्री अमित शाह ने कहा था कि केंद्र सरकार किसानों से बातचीत को तैयार है, लेकिन पहले उन्हें सिंघु और टीकरी बॉर्डर से दिल्ली के बुराड़ी मैदान में आना होगा।
30 Nov 2020 07:07AM,by: Imran Khan
दिल्ली-हरियाणा की सीमा पर प्रदर्शन कर रहे किसानों के धरने का आज पांचवां दिन है। नए कृषि कानूनों के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे किसानों ने रविवार को सिंधु बॉर्डर से हटने से इनकार कर दिया है। इस के साथ ही किसान संगठनों के नेताओं ने देश की राजधानी में प्रवेश के सभी 5 रास्तों को बंद करने की चेतावनी दी है। किसान संगठनों ने दिल्ली के बुराड़ी ग्राउंड में आने पर बातचीत करने की सरकार की अपील को ठुकराते हुए कहा कि वे दिल्ली की सीमाओं पर ही डटे रहेंगे। भारतीय किसान यूनियन (लाखोवाल) के जनरल सेक्रेटरी हरेंद्र सिंह लाखोवाल ने कहा कि सभी किसान संगठनों ने फैसला लिया है कि वे सिधु बॉर्डर पर ही बैठे रहेंगे और आने वाले दिनों में दिल्ली की ओर जाने वाली अन्य सड़कों को भी जाम करेंगे, उन्होंने कहा कि यह पंजाब के 30 किसान संगठनों का फैसला है। प्रदर्शनकारी किसान जंतर-मंतर या रामलीला मैदान में प्रदर्शन करने की इजाजत मांग रहे हैं. लेकिन केंद्र ने कोरोना गाइडलाइंस का हवाला देते हुए उन्हें प्रदर्शन देने से इनकार कर दिया है। बता दें कि केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने शनिवार को किसानों से दिल्ली के बुराड़ी ग्राउंड आकर प्रदर्शन करने की अपील करते हुए उन्हें आश्वासन दिया था कि बुराड़ी ग्राउंड शिफ्ट होने के दूसरे दिन ही भारत सरकार उनके साथ चर्चा के लिए तैयार है। किसान संगठनों की कोर कमेटी की बैठक के बाद पंजाब में भारतीय किसान यूनियन (क्रांतिकारी) के पंजाब के अध्यक्ष सुरजीत सिंह फूल ने दिल्ली के पांच प्रवेशद्वारों को जाम करने की चेतावनी दी। उन्होंने कहा, हम बुराड़ी नहीं जाएंगे और आगे दिल्ली की तरफ आने वाली पांच सड़कों को जाम करेंगे। बता दें कि सिंधु और टिकरी बॉर्डर पर हजारों की तादाद में किसान 26 नवंबर से प्रदर्शन कर रहे हैं। इधर, उत्तर प्रदेश से दिल्ली में प्रवेश करने वाली मुख्य स्थित गाजीपुर बॉर्डर पर भी रविवार को किसान प्रदर्शन कर रहे थे। किसान नेताओं के मूड को देखते हुए केंद्र सरकार और बीजेपी सक्रिय हो गई है। रविवार को रात को बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा के आवास पर हाई लेवेल मीटिंग भी बुलाई गई इसमें गृह मंत्री अमित शाह के अलावा रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर भी शामिल हुए. यह बैठक करीब 2 घंटे चली। दिल्ली बॉर्डर पर किसानों का धरना जारी
30 Nov 2020 07:07AM,by: Imran Khan
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