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पाकिस्तान सरकार ने अपने यहाँ अफ़ग़ानिस्तान से लौटी अमेरिकी सेना के लंबे समय तक टिके रहने की किसी भी संभावना को ख़ारिज कर दिया है और कहा है कि ऐसा कुछ ही वक़्त के लिए हो रहा है. सोशल मीडिया पर इस्लामाबाद एयरपोर्ट की तस्वीरें आ रही थीं जिनमें वहाँ अमेरिकी सैनिक दिख रहे थे. इसके बाद ऐसी अफ़वाह उड़ने लगी कि कहीं अफ़ग़ानिस्तान से लौटे सैनिक अब पाकिस्तान में तो नहीं टिक जाएँगे. पाकिस्तान के गृह मंत्री शेख़ रशीद ने इस बारे में वहाँ के अख़बार डॉन को दिए गए एक इंटरव्यू में स्थिति स्पष्ट की है. उन्होंने अख़बार से कहा कि अफ़ग़ानिस्तान से बाहर निकले कुछ विदेशी लोग पाकिस्तान आए हैं मगर उन्हें केवल 21 से 30 दिनों का ट्रांज़िट वीज़ा दिया गया है. डॉन की रिपोर्ट के अनुसार पाकिस्तानी मंत्री ने ऐसी किसी बात से भी इनकार किया कि पाकिस्तान फिर से मुशर्रफ़ दौर में पहुँच रहा है. उन्होंने पाकिस्तानी दल जमीयत उलेमा-ए-इस्लाम के प्रमुख मौलाना फ़ज़लुर रहमान के इस दावे की भी भर्त्सना की कि सरकार इस्लामाबाद में अमेरिकी लोगों के लिए होटल बुक कर रही है. शेख़ रशीद ने बताया कि अभी तक अफ़ग़ानिस्तान में तोर्खम सीमा के रास्ते 2,192 लोग पाकिस्तान आए हैं जबकि 1,627 लोग हवाई जहाज़ों से इस्लामाबाद पहुँचे हैं. साथ ही कुछ लोग चमन बोर्डर केर रास्ते भी आए हैं. उन्होंने इससे पहले एक प्रेस कॉन्फ़्रेंस में बताया कि अफ़ग़ानिस्तान से लगभग सभी पाकिस्तानी नागरिकों को निकाला जा चुका है. उन्होंने कहा कि लगभग 30 से 40 पाकिस्तानी लोग अभी भी वहाँ हैं मगर वो लौटना नहीं चाहते क्योंकि वहाँ उनके परिवार बसे हैं.

01 Sep 2021 01:17AM,
by: Imran Khan
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अफगानिस्तान नए दौर से गुजर रहा है . वहां सत्ता में बदलाव के बाद भारत के सामने सुरक्षा संबंधी चिंताओं के साथ ही कई अन्य अहम मसले हैं। अफगानिस्तान में भारत के आर्थिक हितों की रक्षा और दोस्ती बनाए रखने की कवायद आदि बहुत महत्त्वपूर्ण सवाल हैं. वहां काबुल पर काबिज तालिबान अफगानिस्तान को 'इस्लामिक अमीरात आँफ अफगानिस्तान’के तौर पर परिभाषित कर रहा है।साल 2020 के ‘दोहा समझौते,पर तालिबान ने इसी नाम से हस्ताक्षरकर्त किए थे। हाल में भारत को लेकर दो परिघटनाएं अहम हैं। एक तो को खुद तालिबान ने दूर करने का प्रयास किया है। दूसरे, भारत की अध्यक्षता के दौरान संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की प्रस्तावना में 15 दिनों केभीतर बदलाव कर संकेत दिया गया कि तालिबान से अब गुरेज नहीं. भारत समेत संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के सदस्य तालिबान को अब सत्ता के एक भागीदार के रूप में देख रहे हैं. "नये दौर" के अफगानिस्तान से क्या बढ़ेगी भारत की चिंताएं ?

31 Aug 2021 08:58AM,
by: Imran Khan