अन्य

Generic placeholder image

कृषि कानूनों को लेकर मंगलवार को गृह मंत्री अमित शाह और 13 किसान नेताओं की बातचीत हुई। बुधवार को सरकार और किसानों की होने वाली वार्ता से पहले इस बैठक को अहम माना जा रहा था। लेकिन ये भी बेनतीजा रही। एक ओर जहां किसान कृषि कानूनों को वापस लेने की मांग कर रहे हैं तो वहीं गृह मंत्री ने कृषि से जुड़े तीनों कानूनों को वापस लेने से इनकार कर दिया। अमित शाह और 13 नेताओं की मुलाकात 2 घंटे चली। बैठक के बाद किसान नेता हनन मुल्ला ने कहा कि सरकार बुधवार को लिखित में प्रस्ताव देगी। किसान सरकार के प्रस्ताव पर दोपहर 12 बजे सिंधु बॉर्डर पर बैठक करेंगे। उन्होंने ये भी कहा कि सरकार के साथ बुधवार को होने वाली छठे दौर की वार्ता भी स्थगित कर दी गई है। हनन मुल्ला ने कहा कि सरकार कानून वापस नहीं लेगी।

09 Dec 2020 02:55AM,
by: Imran Khan
Generic placeholder image

ईरानी वैज्ञानिक मोहसिन फखरीजादेह का कत्ल कर दिया गया, जिस तरीके से कत्ल की इस वारदात को अंजाम दिया गया।वो वाकई में हैरान करने वाला है। फखरीजादेह के कत्ल में ऐसी तकनीक का इस्तेमाल हुआ,उसका इस्तेमाल इससे पहले कहीं नहीं हुआ। चौंकाने वाली बात ये है कि जिस बंदूक से फखरीजादेह का कत्ल किया गया वो तो भले ही ईरान में एक ट्रक पर लगाई गई थी लेकिन उस ट्रक पर गन का ट्रिगर दबाने के लिए कोई इंसान मौजूद नहीं था।बल्कि धरती से लाखों किलोमीटर की दूरी पर आसमान में तैर रही एक सैटेलाइट का इशारा मिलते ही उस गन ने फखरीजादेह को गोलियों से भून डाला। ईरानी वैज्ञानिक मोहसिन फखरीजादेह के कत्ल को लेकर पहले अलग-अलग कयास लगाए जा रहे थे. कहीं खबर ये थी कि फखरीजादेह के काफिले पर हमला कर उनको मौत के घाट उतारा गया तो कहीं कहा जा रहा था कि एक ट्रक पर लगी बंदूक से उनको निशाना बनाया गया था. हालांकि अब अधिकारिक तौर पर इस्लामिक रेवलूशन गार्डस कॉर्प्स के प्रवक्ता ब्रिगेडियर जनरल रमजान शरीफ ने दावा किया है कि फखरीजादेह का कत्ल सैटेलाइट से ऑपरेट होने वाले हथियार से किया गया है. हर कोई हैरान है कि कैसे एक बंदूक का निशाना इतना अचूक हो सकता है कि वो चलती कार में जा रहे एक शख्स की जान ले सके।चौंकाने वाली बात ये भी है कि जब फखरीजादेह का क़त्ल हुआ उस वक़्त उस कार में उनकी पत्नी भी मौजूद थीं जो उनसे कुछ इंच की दूरी पर बैठी हुई थीं लेकिन इस हमले में उनको कोई नुकसान नहीं पहुंचा। बताया जा रहा है कि हमले के दौरान फखरीजादेह पर 13 राउंड फायरिंग की गई और सब के सब निशाने अचूक थे यानि जब फायर हुए तो वो एक सेंटीमीटर भी निशाने से इधर- उधर नहीं हुआ।अंदाजा लगाना मुश्किल नहीं है कि कत्ल में इस्तेमाल किया गया हथियार इतना खतरनाक था कि बचने की कोई गुंजाइश बाकी नहीं छोड़ी गई थी। एजेंसियों की खबरों के मुताबिक फखरीजादेह के कत्ल में हाल में ही बनाई गई गन स्मेश होपर का इस्तेमाल किया गया था। स्मेश होपर बंदूक के चर्चे आज हर कहीं हो रहे हैं। क्योंकि इसकी खासियत ही कुछ ऐसी है।ये बंदूक न सिर्फ ऑटोमैटिक है बल्कि रिमोट कंट्रोल से भी चल सकती है। साथ ही ये निशाने को खुद ही स्कैन कर लॉक कर लेती है. बुलेटप्रूफ गाड़ी में भी इससे बच पाना मुश्किल है।कुछ दिन पहले ही इजराइल की एक कंपनी ने इस मैन पोर्टेबल ऑटोमेटिक बंदूक को लॉन्च किया था और ये भी एक कारण है कि इजरायल के ऊपर आज कत्ल के आरोप लग रहे हैं. इजरायली कंपनी ने दावा किया था कि ये बंदूक अपने आप लक्ष्य को स्कैन कर निशाने को लॉक कर सकती है। जिसके बाद दूर बैठा ऑपरेटर टेबलेट जैसी वायरलेस डिवाइस से जब चाहे तब फायर कर सकता है। इस गन को इजरायली कंपनी ने विकसित किया था। इस गन को लाइट रिमोट कंट्रोल्ड वेपन स्टेशन के नाम से भी जाना जाता है। यह सिस्टम SMASH 2000 कम्प्यूटराइज़ गनसाइट और दूर से नियंत्रित किए जाने वाले माउंट से मिलकर बना है. जिसे किसी ट्रायपॉड,जमीन या किसी गाड़ी के ऊपर लगाया जा सकता है। गनसाइट को किसी ऑटोमेटिक गनमाउंट की जरूरत नहीं होती है। यह अपने आप ही लक्ष्य को ढूंढकर उसे लॉक कर लेती है। जिसके बाद दूर बैठे ऑपरेटर को जब लगता है कि अब फायर करने से लक्ष्य को ज्यादा नुकसान होता, तब वह रिमोट कंट्रोल के जरिए फायर कर सकता है. इससे पहले यह दावा ईरान की अरबी स्टेट न्यूज एजेंसी अल-आलम ने भी किया था। रिपोर्ट्स के मुताबिक फखरीजादेह की हत्या रिमोट-कंट्रोल हथियार से की गई थी। यह उनसे 150 मीटर दूर खड़ी गाड़ी में लगा था। इस बात की पुष्टि बाद में की गई थी कि घटनास्थल पर कोई और शख्स मौजूद नहीं था. शरीफ ने कहा है कि हत्या को अडवांस्ड इलेक्ट्रॉनिक इक्विपमेंट से अंजाम दिया गया। जिसे सैटेलाइट से कंट्रोल किया जा रहा था।

08 Dec 2020 12:04PM,
by: Imran Khan
Generic placeholder image

राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (आरएसएस) समर्थित भारतीय किसान संघ (बीकेएस)ने कहा कि वह केन्द्र के नए कृषि कानूनों के खिलाफ "‘भारत बंद'" का समर्थन नहीं करेगे लेकिन इन कानूनों में कुछ "सुधार'" होना चाहिये। किसानों का प्रतिनिधित्व करने वाले कुछ संगठनों ने हाल ही में कृषि से संबंधित तीन नए कानूनों के विरोध में आज आठ दिसंबर को देशव्यापी बंद का आह्वान किया है। बीकेएस के संगठन मंत्री मघ्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ महेश चौधरी ने कहा।"हम भारत बंद का समर्थन नहीं कर रहे हैं, लेकिन हम इन तीन कानूनों का इस रूप में समर्थन नहीं कर रहे हैं। हम इनमें कुछ सुधार चाहते हैं और इसके लिये अगस्त में केन्द्र को पत्र लिखा भी है जिसमें गांवों से मिले सुझाव के अनुसार न्यूनतम समर्थन मूल्य पर उपज खरीद की सुविधा देने की सिफारिश की है। उन्होंने कहा कि केन्द्र सरकार ने पहले ही हमें आश्वासन दिया है कि इस पर गौर किया जायेगा। उन्होंने कहा कि अधिनियम के "एक बाजार एक देश" सहित कई अन्य प्रावधानों का बीकेएस दृढ़ता से समर्थन करता है और इससे किसानों को काफी फायदा होगा। दिल्ली के बाहरी इलाकों में किसानों द्वारा किये जा रहे विरोध प्रदर्शन को समाप्त करने की मांग करते हुए चौधरी ने कहा। इसमें शामिल लोगों को और वहां लगाये जा रहे नारों को आप जानते हैं। दिल्ली की विभिन्न सीमाओं पर किसानों द्वारा नए कृषि कानूनों के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया जा रहा है. इन किसानों में अधिकांश पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश के किसान शामिल हैं। केन्द्र और किसान नेताओं के बीच कई दौर की बातचीत हो चुकी है, लेकिन इस गतिरोध का समाधान नहीं निकला है।

08 Dec 2020 03:07AM,
by: Imran Khan