लेख

Generic placeholder image

आज सुबह एक पीड़ादायक और लगभग उत्साहविहीन समाचार आया कि विनेश फोगाट ने कुश्ती से संन्यास ले लिया। हर व्यक्ति को ये अधिकार होता है कि वे अपने बेहतरीन जीवन के लिए बेहतर निर्णय करे। विनेश फोगाट ने भी अपने स्तर पर सोच समझ कर निर्णय लिया होगा। सार्वजनिक जीवन जीने वालो के लिए बहुत सारी बाध्यता होती है और उनसे उम्मीद की जाती है कि वे कोई बड़ा निर्णय लेने की तैयारी में होते है तो अपने परिवारजन, शुभ चिंतकों से सलाह मशविरा जरूर करते है।खिलाड़ियों की बात करे तो वे अपने मामलो में कोच और साथियों से भी चर्चा जरूर करते है। विनेश फोगाट ने जिस तरीके से संन्यास लेने की घोषणा की है वह सुनियोजित न होकर तात्कालिक आवेश में लिया गया निर्णय ज्यादा लगता है। विनेश फोगाट और संन्यास

08 Aug 2024 12:08PM,
by: Babuaa Desk
Generic placeholder image

सतारा और कोल्हापुर महाराष्ट्र के दो शहर है जिनकी आपस में दूरी 122 किलोमीटर है। ये दूरी दो खिलाड़ियों के बीच की भी है जिन्होंने 1952 और 2024ओलंपिक खेलों में देश का नाम रोशन किया है। पहले है के डी जाधव जिन्होंने 1952के हेलेंस्की ओलंपिक खेलों मे आजाद भारत की तरफ से पहला व्यक्तिगत मेडल दिलाया था। 72साल गुजर गए और पेरिस ओलंपिक में एक बार फिर अवसर आया जब महाराष्ट्र के स्वप्निल ने सपना सच करते हुए देश को तीसरा मेडल दिलवाया।। मेडल का रंग कैसा है ये सारगत बात नही है क्योंकि विश्व के मंच पर एक एक शूट के आगे पीछे होने से मेडल हाथ से छिटक जाता है। सेकंड के सौवें हिस्से से भारतीय ओलंपिक संघ की वर्तमान अध्यक्ष पी टी उषा मेडल नही जीत पाई थी। I कारण ब्रॉन्ज मेडल भी गोल्ड मेडल के बराबर ही हैसियत रखता है। सपने को सच करते स्वप्निल

02 Aug 2024 06:43AM,
by: Babuaa Desk
Generic placeholder image

बात 1900 ओलंपिक की है।आधुनिक ओलंपिक खेलों के जन्मदाता पियरे द कुबरतिन के देश फ्रांस में दूसरे ओलम्पिक खेलों का आयोजन किया गया। ये खेल का आयोजन कम प्रदर्शनी,मेला, सर्कस सहित दीगर आयोजन भी था। 14मई से 28अक्तूबर 1900 याने 164दिन(5माह14 दिन) तक चले आयोजन में कौन खिलाड़ी कहां से आया कैसे भाग लिया कैसे स्पर्धा पूरी हुई इसका अंदाजा नहीं था। भारत का रहने वाला अंग्रेज नार्मन पिचार्ड भी फ्रांस गया। दो स्पर्धाओं 200मीटर और 200मीटर बाधा दौड़ में भाग लिया और सिल्वर मेडल भी जीत गया। बात आई गई हो गई।1928में पहली बार ब्रिटिश झंडे के तले भारत की हॉकी टीम सहित खेल के खिलाड़ी अधिकृत रूप से भाग लिए । भारत हॉकी में गोल्ड मेडल जीता और फिर 1952तक अकेले हॉकी टीम गोल्ड मेडल लेकर जाती , जीतती और पहन कर वापस आ जाती। 1952मे के डी जाधव ने व्यक्तिगत रूप से पहला ब्रॉन्ज मेडल बेटम वेट कुश्ती में जीता था। 1956और1964में भारतीय हॉकी टीम ने फिर गोल्ड मेडल जीता ।1960 में सिल्वर मेडल हॉकी टीम के हिस्से में आया।1968,1972में हॉकी टीम ने ब्रॉन्ज मेडल जीता और 1980मास्को ओलंपिक में आखरी बार गोल्ड मेडल जीता। मनु भाकर जैसा कोई नहीं

31 Jul 2024 01:50AM,
by: Babuaa Desk
Generic placeholder image

 26जुलाई 2024से फ्रांस की राजधानी पेरिस में वे ओलंपिक खेलों की शुरुवात होने वाली है। खेल और खिलाड़ियों के इस महाकुंभ में सारे देशों के दस हजार से अधिक खिलाड़ी खेलो में पदक के लिए जोर लगाएंगे। हमारा देश भारत भी ओलंपिक खेलों में भाग ले रहा है। भारत में पिछले कुछ वर्षो से क्रिकेट के अलावा भी दीगर खेलो के खिलाड़ियों ने विश्व स्तर पर अपनी छाप छोड़ी है। इसके चलते फिल्म निर्माताओं और निर्देशकों को लगा कि खेल और खिलाड़ी विषयो पर फिल्मे बनाई जानी चाहिए। इस कारण खेल और खिलाडियों दोनो विषयो पर फिल्मे बन रही है। सफलता और असफलता से परे ये काम निसंदेह साहस का काम है जिसकी खेल भावना के तर्ज पर बधाई दिया जाना चाहिए। खेल खिलाड़ी और फिल्मे

25 Jul 2024 05:00AM,
by: Babuaa Desk