तीस साल पहले "क"नाम से फिल्म बनाने वाले राकेश रोशन ने एक फिल्म बनाई थी - "करण अर्जुन"।पुनर्जन्म विषय पर बनी इस फिल्म का एक डायलॉग "मेरे करण अर्जुन आयेंगे" ।ये डायलॉगआज भी अविस्मरणीय डायलॉग है। करण अर्जुन फिल्म तीस साल बाद सिनेमाघरों(आज के दौर में मल्टीप्लेक्स) में फिर से लग रही है। कॉन्वेंट स्कूल से निकली नई जनरेशन इस फिल्म को देखेंगे या नहीं देखेंगे ये तो वक्त ही बताएगा। ये भी संशय है कि तीस साल पहले का दर्शक जो टेलीविज़न और नेट फिलिक्स पर घर बैठे फिल्म को अपने हिसाब से टुकड़े टुकड़े में फिल्म देखना पसंद करता है वो थियेटर में जाकर करण अर्जुन को देखेगा या नहीं करण अर्जुन के बहाने
18 Nov 2024 07:44AM,by: Babuaa Desk
काल्पनिक दुनियां में विचरना इंसान की शगल होती है।इसी बात को ध्यान में रखकर मनोरंजन के लिए फिल्मों का आविष्कार हुआ।भारत में1913से फिल्मे बनना शुरू हुई । मूक फिल्म "राजा हरिश्चंद्र" के माध्यम से दर्शकों ने पर्दे पर किरदारों को चलते देखा।1931में बोलती फिल्मों का दौर "आलम आरा" से शुरू हुआ। कालांतर में ब्लैक एंड व्हाइट के बाद रंगीन फिल्मों के दौर में अनेक नायकों ने लोगों का मनोरंजन किया। दिलीप कुमार, ट्रेजेडी किंग कहलाते थे।राज कुमार,राज कुमार, देवानंद, एक एक युग थे। बिना हाव भाव वाले राजेंद्र कुमार जिनकी 25फिल्मे लगातार सिल्वर जुबली मनाई,इसके चलते वे जुबली कुमार भी कहलाए।अर्बन हीरो देवानंद थे,जिनकी महिलाएं दीवानी हुआ करती थीं। इन सभी की दीवानगी लोगो ने देखा सुना लेकिन दो नायक ऐसे आए जिन्होंने हीरोइज़्म की परिभाषा बदल कर रख दी। ये दो नायक है राजेश खन्ना और अमिताभ बच्चन। राजेश खन्ना और अमिताभ बच्चन का मतलब; प्रेम और विद्रोह
21 Oct 2024 05:34AM,by: Babuaa Desk
हिंदी फिल्मों में गाने उतने ही अनिवार्य है, जितने नायक और नायिका। इन नायक नायिकाओ के लिए गाने तब भी अनिवार्य थे जब फिल्मे बनना शुरू हुई थी ।गानों की प्रासंगिकता आज भी है वक्त के साथ भावार्थ बदले है लेकिन गाने आज भी सदाबहार है इसका प्रमाण ये भी है अंग्रेजी माध्यम से पढ़ने वाली पीढ़ी भी गुनगुनाती तो हिंदी गाना ही है।हिंदी दिवस के समय मेरे एक परिचित ने ध्यान दिलाया था कि हिंदी भाषा के प्रसार प्रचार में हिंदी फिल्मी गानों का भी अहम योगदान है नायकों के गायक -किशोर कुमार
15 Oct 2024 02:12AM,by: Babuaa Desk
मैने रतन टाटा को कभी भी देश का सबसे प्रतिष्ठित उद्योगपति नहीं माना बल्कि सबसे प्रतिष्ठित दिलदार व्यक्ति माना जिसने धन के बजाय जन से बे इंतिहा मोहब्बत की। दुनियां में पैसे कमाने वाले करोड़ो लोग है लेकिन वे इसलिए याद रखे जाते है कि उनकी कंपनी ने साल में कितना मुनाफा कमाया या कितना घाटा हुआ।देश की बैंको से कितना कर्ज लिया, कितना एनपीए का लाभ लिया।जनता से कितना पैसा शेयर के रूप में लिया,लाभ दिलाया या डूबा दिया। कुछ औधोगिक घरानों को हम वैभव का असीमित प्रदर्शन करते हुए भी देखते है जो पारिवारिक कार्यक्रमों का सार्वजनीकरण करते है कि ऊब होने लगती है कि पारिवारिक कार्यक्रम है या ऐसा दिखावा जिससे दिखावा करने वाला परिवार ही उपहास और हास्य का प्रतिमान बन जाता है। टाटा परिवार ,इस देश की रीढ़ की हड्डी के रूप में स्थापित है। टाटा परिवार के संस्थापक ने इस देश के प्रधान मंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू को दूसरी पंच वर्षीय योजना को उद्योग प्रमुख होने का साहस दिया। कहने में कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी कि अगर देश उद्योगों के मामले में आत्म निर्भर हो रहा है तो इसकी बुनियाद टाटा परिवार ने ही रखी थी। अंग्रेजो ने भारत को इतना अशक्त बना दिया था कि सुई के लिए भी दूसरो पर निर्भर रहना पड़ता था। टाटा, रतन टाटा...
10 Oct 2024 09:21AM,by: Babuaa Desk
रात अलसाई हुई थी.....।अंधेरा था, लाइट जला कर दीवाल में टांगी घड़ी को देखा।सवा दस बज रहे थे।लाइट बंद कर खिड़की से बाहर झांक कर देखा।समय के हिसाब से ज्यादा सुनसान था।मानो कि बारह बजे से अधिक का समय हो चला हो।घड़ी तो सवा दस बजना बता रही थी। बिस्तर पर पड़े पड़े सोच रहा था कि वक्त भी अजीब है।एक समय था कि कब दिन होती थी कब रात होती थी पता नही चलता था।अब वक्त को काटने के लिए जतन उठाने पड़ रहे है। घड़ी की मौत..!
08 Oct 2024 11:28AM,by: Babuaa Desk
हंगरी की राजधानी बुकापेस्ट में भारत की महिला टीम ने शानदार प्रदर्शन करते हुए पहली बार टीम गोल्ड मेडल जीता है।इस टीम में दिल्ली की एक खिलाड़ी तान्या सचदेव भी थी जिसने मौके पर शानदार खेल का प्रदर्शन किया। ब्यूटी विद ब्रेन का मिलजुला रूप तान्या सचदेव है। तान्या सचदेव, शह और मात की खिलाड़ी
30 Sep 2024 10:18AM,by: Babuaa Desk
देहदान की प्रक्रिया में किसी मृत व्यक्ति के शरीर को चिकित्सा छात्रों के अध्ययन के लिए मृत व्यक्ति के वैध इच्छा अनुसार दान किया जाता है। ऐसे व्यक्ति जिनका मस्तिष्क मृत हो जाता है उसके परिवार जनों की सहमति से अंग दान भी किया जाता है ।प्रमुख रूप से आंख,यकृत, फेफड़ा दिल और चमड़ा दान होता है। जिंदा व्यक्ति के शरीर में एक अंग ऐसा भी है दिल,जो केवल धड़कता भर नही है बल्कि प्रेम या प्यार में लेन देन के अलावा गच्चा खाने पर तोड़ फोड़ के भी काम आता है। प्रेम और विरह रस के गीतों में दिल की बहुत बड़ी जगह है। के एल सहगल से लेकर अरिजीत सिंह और नूरजहां से लेकर श्रेया घोषाल से गीतकारों ने दिल लेने,देने, जलाने, जोड़ने तोड़ने,के गीत गवाए है। दिल ही तो है!
29 Sep 2024 10:14AM,by: Babuaa Desk
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