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  हिन्दू धर्म मे मान्यता है कि एक व्यक्ति का जीवन अमूमन सौ साल का होता है। इस निर्धारित उम्र में कितनी आयु जीता है और कैसे जीता है ये बात मायने रखती है। सुख- दुख, सफलता-असफलता को जीवन मे एक सिक्के के दो पहलू माने जाते है। सुख और सफलता के समय सामंजस्य बनाये रखना साथ ही दुख - असफलता में संतुलन बनाये रखना ही मायने रखता है। देव आनंद की "गाइड" जीवन दर्शन की एक सच्ची दास्तां थी। फिल्म उद्योग में एक कलाकार ऐसा रहा जिसने इस मापदंड को जीवन भर अपनाया। ये थे धर्म देव आनंद जो फिल्मों में आये तो देव आनंद हो गए। एवरग्रीन या सदाबहार शब्द देव आनंद का पर्याय रहा। मुझे अच्छे से याद है कि एक जमाने मे इंजीनियरिंग कॉलेज में सिविल ब्रांच को देवानंद ब्रांच कहा जाता था याने सदाबहार ब्रांच।आजकल कंप्यूटर साइंस सदाबहार है। शहर के नायक थे सदाबहार देव आनंद

27 Sep 2024 01:40AM,
by: Babuaa Desk
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किसी भी देश मे वन नेशन के साथ अनेक बातों को जोड़ कर नई व्यवस्था का निर्माण किया जा सकता है। संविधान में संघीय ढांचे में राज्यो के स्वतंत्र अस्तित्व को लेकर अनेक बार विवाद की स्थिति आती है। ऐसे में कई बार महसूस होता है कि वन नेशन में सभी बातें समान क्यो नही है। 
कुछ समय पहले कोरोना काल मे जब हर व्यक्ति एक जगह पर थम गया था तब भोजन की समस्या सबसे बड़े रूप में उभरी।वन नेशन- वन राशनकार्ड से देश भूख से बेहतर तरीके से लड़ सका।
वन नेशन वन ला की  प्रक्रिया प्रगति में है।इसके बाद वन नेशन वन इलेशन की तैयारी राजपत्र में प्रकाशन के साथ शुरू हुआ था और अब राष्ट्रपति द्वारा भूतपूर्व राष्ट्रपति कोविंद द्वारा प्रस्तुत रिपोर्ट को प्राप्त कर लिया है। वन नेशन, वन इलेक्शन

19 Sep 2024 10:27AM,
by: Babuaa Desk
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 भारत या हिंदुस्तान यही दो शब्द ऐसे है जिससे इस बात का आभास होता है कि दुनियां में एक देश है जो जनसंख्या के नाम पर दुनियां का पहले नंबर का देश है। इस देश के साथ एक दुर्भाग्य भी है कि इस देश की दूसरे देशों के समान खुद की राष्ट्र भाषा नही है बल्कि राजभाषा है। हिंदी के राजभाषा होने का उल्लेख देश के संविधान के अध्याय17के खंड343(1) में है। दुनियां में सर्वाधिक रूप से बोले जाने वाली भाषा अंग्रेजी,फिर चीनी और तीसरे क्रम में हिंदी भाषा है जो बोली और लिखी जाती है।इसके बाद भी अगर हिंदी राष्ट्र भाषा, राष्ट्रीय भाषा नहीं है तो ये देश में राजनीति करने वालो के लिए चिंतन का विषय होना चाहिए। न हिंदी है न वतन हिंदुस्तान हमारा

14 Sep 2024 09:43AM,
by: Babuaa Desk
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  आमतौर पर ये माना जाता है कि एक शिक्षक जिंदगी भर शिक्षक रहता है ।अगर हम विद्यालय,महाविद्यालय या किसी प्रशिक्षण संस्था की बात करे तो विषय विशेष के ही शिक्षक विद्यार्थी को छात्र जीवन में मिले है। बहुत कम ऐसे शिक्षक देखे जाते है जिनका ज्ञान क्षेत्र विस्तृत होता है। शैक्षणिक संस्थानों सहित जीतने भी सीखने के क्षेत्र में गुरुजन है उनके ज्ञान की सीमा निर्धारित होती है। आदिकाल में देखे तो मनुष्य की सबसे बड़ी गुरु प्रकृति ही थी जिससे सीखने का क्रम शुरू हुआ। रोटी, कपड़ा और मकान जैसी मूलभूत सुविधा के लिए प्रकृति से ही अनाज, छाल - चमड़ा,गुफा का ज्ञान मिला । वक्त के साथ आवश्यकता सृजित हुई तो आविष्कार ने जन्म लिया। जात न पूछो गुरु की

05 Sep 2024 12:54PM,
by: Babuaa Desk