हंगरी की राजधानी बुकापेस्ट में भारत की पुरुष और महिला शतरंज टीम ने शानदार प्रदर्शन करते हुए डबल गोल्ड मेडल जीतकर इतिहास रच दिया है। शह और मात के खेल में पुरुषो की टीम से बेहतर प्रदर्शन महिलाओं ने किया।टीम को जीतने के लिए हर खिलाड़ी ने बेहतर प्रदर्शन किया टीम में सबसे कम उम्र की खिलाड़ी थी दिव्या देशमुख, जो नागपुर की रहने वाली है। हाल ही में दिव्या ने बारहवीं की परीक्षा उत्तीर्ण की है। शतरंज की रानी - दिव्या देशमुख
29 Sep 2024 06:08AM,by: Babuaa Desk
हिन्दू धर्म मे मान्यता है कि एक व्यक्ति का जीवन अमूमन सौ साल का होता है। इस निर्धारित उम्र में कितनी आयु जीता है और कैसे जीता है ये बात मायने रखती है। सुख- दुख, सफलता-असफलता को जीवन मे एक सिक्के के दो पहलू माने जाते है। सुख और सफलता के समय सामंजस्य बनाये रखना साथ ही दुख - असफलता में संतुलन बनाये रखना ही मायने रखता है। देव आनंद की "गाइड" जीवन दर्शन की एक सच्ची दास्तां थी। फिल्म उद्योग में एक कलाकार ऐसा रहा जिसने इस मापदंड को जीवन भर अपनाया। ये थे धर्म देव आनंद जो फिल्मों में आये तो देव आनंद हो गए। एवरग्रीन या सदाबहार शब्द देव आनंद का पर्याय रहा। मुझे अच्छे से याद है कि एक जमाने मे इंजीनियरिंग कॉलेज में सिविल ब्रांच को देवानंद ब्रांच कहा जाता था याने सदाबहार ब्रांच।आजकल कंप्यूटर साइंस सदाबहार है। शहर के नायक थे सदाबहार देव आनंद
27 Sep 2024 01:40AM,by: Babuaa Desk
हंगरी की राजधानी बुकापेस्ट में भारतीय पुरुष और महिलाओं की टीम ने शतरंज के चौसठ खानो के बोर्ड पर ऐसी बिसात बिछाई कि दुनियां के 195देश देखते रह गए। भारत की पुरुष और महिला टीम ने ऐसी शह और मात दी कि सारी दुनियां को ये कहना पड़ रहा है कि अगले दो साल के लिए शतरंज की बादशाहत गुकेश,प्रागनंदा, अर्जुन एरिगेसी,पी. हरिकृष्णा और श्रीनाथ नारायणन की पुरुष टीम के पास है।इतना ही नहीं देश की बेटियां दिव्या देशमुख, वर्तिका अग्रवाल, हरिका दोनोंवेल्ली, आर वैशाली और तान्या सचदेव ने ऐसी बाजी पलटी कि महिला टीम ने भी इतिहास रच दिया शतरंज के पहले बादशाह हम है
24 Sep 2024 01:20AM,by: Babuaa Desk
किसी भी देश मे वन नेशन के साथ अनेक बातों को जोड़ कर नई व्यवस्था का निर्माण किया जा सकता है। संविधान में संघीय ढांचे में राज्यो के स्वतंत्र अस्तित्व को लेकर अनेक बार विवाद की स्थिति आती है। ऐसे में कई बार महसूस होता है कि वन नेशन में सभी बातें समान क्यो नही है।
कुछ समय पहले कोरोना काल मे जब हर व्यक्ति एक जगह पर थम गया था तब भोजन की समस्या सबसे बड़े रूप में उभरी।वन नेशन- वन राशनकार्ड से देश भूख से बेहतर तरीके से लड़ सका।
वन नेशन वन ला की प्रक्रिया प्रगति में है।इसके बाद वन नेशन वन इलेशन की तैयारी राजपत्र में प्रकाशन के साथ शुरू हुआ था और अब राष्ट्रपति द्वारा भूतपूर्व राष्ट्रपति कोविंद द्वारा प्रस्तुत रिपोर्ट को प्राप्त कर लिया है। वन नेशन, वन इलेक्शन
19 Sep 2024 10:27AM, by: Babuaa Desk
आतिशी के दिल्ली के मुख्य मंत्री बनते ही दिल्ली पहला राज्य और केंद्र शासित प्रदेश बन गया है जहां तीन महिला मुख्य मंत्री बने है। सुषमा स्वराज, शीला दीक्षित के बाद आतिशी तीसरी मुख्य मंत्री बनी है। तमिलनाडु और उत्तर प्रदेश देश में दो महिला मुख्य मंत्री देने वाले राज्य है। बी. एस.जानकी और जयललिता ने तमिलनाडु में महिला मुख्य मंत्री बनने का गौरव हासिल किया है। उत्तर प्रदेश में सुचेता कृपलानी और मायावती मुख्य मंत्री बनी है। दिल्ली:तीन महिला मुख्य मंत्री देने वाला पहला राज्य
18 Sep 2024 10:39AM,by: Babuaa Desk
भारत या हिंदुस्तान यही दो शब्द ऐसे है जिससे इस बात का आभास होता है कि दुनियां में एक देश है जो जनसंख्या के नाम पर दुनियां का पहले नंबर का देश है। इस देश के साथ एक दुर्भाग्य भी है कि इस देश की दूसरे देशों के समान खुद की राष्ट्र भाषा नही है बल्कि राजभाषा है। हिंदी के राजभाषा होने का उल्लेख देश के संविधान के अध्याय17के खंड343(1) में है। दुनियां में सर्वाधिक रूप से बोले जाने वाली भाषा अंग्रेजी,फिर चीनी और तीसरे क्रम में हिंदी भाषा है जो बोली और लिखी जाती है।इसके बाद भी अगर हिंदी राष्ट्र भाषा, राष्ट्रीय भाषा नहीं है तो ये देश में राजनीति करने वालो के लिए चिंतन का विषय होना चाहिए। न हिंदी है न वतन हिंदुस्तान हमारा
14 Sep 2024 09:43AM,by: Babuaa Desk
राजा महाराजाओं के युग में खेल के नाम पर सीमित खेल हुआ करते थे।कुश्ती, घुड़सवारी, रथ दौड़ सहित कुछ ही खेल थे। युद्ध के आयुध में प्रवीणता के नाम पर अभ्यास की परीक्षा ही प्रतियोगिता का रूप लिया करती थी। खेल और खिलाड़ी हमेशा से राजतंत्र कह ले या प्रजातंत्र के दौर में संरक्षण में ही पले है बढ़े है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और तीरंदाजी संघ
12 Sep 2024 10:51AM,by: Babuaa Desk
आमतौर पर ये माना जाता है कि एक शिक्षक जिंदगी भर शिक्षक रहता है ।अगर हम विद्यालय,महाविद्यालय या किसी प्रशिक्षण संस्था की बात करे तो विषय विशेष के ही शिक्षक विद्यार्थी को छात्र जीवन में मिले है। बहुत कम ऐसे शिक्षक देखे जाते है जिनका ज्ञान क्षेत्र विस्तृत होता है। शैक्षणिक संस्थानों सहित जीतने भी सीखने के क्षेत्र में गुरुजन है उनके ज्ञान की सीमा निर्धारित होती है। आदिकाल में देखे तो मनुष्य की सबसे बड़ी गुरु प्रकृति ही थी जिससे सीखने का क्रम शुरू हुआ। रोटी, कपड़ा और मकान जैसी मूलभूत सुविधा के लिए प्रकृति से ही अनाज, छाल - चमड़ा,गुफा का ज्ञान मिला । वक्त के साथ आवश्यकता सृजित हुई तो आविष्कार ने जन्म लिया। जात न पूछो गुरु की
05 Sep 2024 12:54PM,by: Babuaa Desk
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