लेख

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खेल ओर खिलाड़ी विषयो पर लेख लिखने से पहले उनके प्रदर्शन को देखना अनिवार्य होता है। इसे उनकी मेहनत को साकार होते देखा जा सकता है। आदमी, सामाजिक प्राणी है। परिवार, समाज में  रहता है ।मनुष्य होने के कारण उसके मनोभाव दिखते है। किसी भी व्यक्ति में अपने या अपने परिवार के सदस्य को देखना साधारण बात है। इन दिनों पेरिस में पैरा ओलंपिक खेलों का आयोजन चल रहा है। ये खेल उन लोगो के लिए है जिनके सारे अंग नहीं है।वे संपूर्णांग न होकर विकलांग है। उनमें से अनेक खिलाड़ियों को देख कर मन द्रवित हो जाता है लेकिन अगले ही पल उनके प्रति सम्मान बढ़ जाता है ये सोच कर कि विपरीत परिस्थितियों में भी इन्होंने हिम्मत नही हारी। एक अंग न होने पर बहाना नहीं बनाया, कृपा के पात्र नहीं बने बल्कि खुद को ऐसे सांचे में ढाला कि आज करोड़ो अरबों लोग इनके प्रदर्शन पर तालियां बजा रहे है। धनुर्धर शीतल कुमारी और प्रेरणा

04 Sep 2024 10:49AM,
by: Babuaa Desk
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एक तरफ दो मेडल जीतने वाली मनु भाकर के जीत के चर्चे है बहुतायत से।उनकी जीत की बाते है क्योंकि वे तीन मेडल लाते लाते रह गई।उनके बारे में चर्चा है कि वे पहली भारतीय खिलाड़ी है जिन्होंने एक ओलम्पिक खेल में दो पदक जीते है। उनकी चर्चा ये भी है कि वे डीएवी कालेज चंडीगढ़ की पोस्ट ग्रेजुवेट स्टूडेंट है। ये भी बात है कि 22साल की उम्र में 12करोड़ रुपए उनके पास है। ये भी चर्चा है कि उन्होंने कम उम्र में केरल में हुए राष्ट्रीय खेल में एक दो तीन नहीं बल्कि 9गोल्ड मेडल जीते थे। ये भी बात है कि जूनियर ओर सीनियर वर्ल्ड शूटिंग स्पर्धा में भी उन्होंने गोल्ड मेडल जीता हुआ है। राष्ट्र मंडल खेल का भी गोल्ड मेडल मनु के पास है।देश की करोड़ो युवतियों के लिए ही नहीं बल्कि करोड़ो युवकों के लिए भी मनु भाकर रोल मॉडल है। मनु 2021के टोक्यो ओलंपिक खेलों में असफल रही थी। असफलता ने मनु को तोड़ कर रख दिया था। वे खेल से बाहर हो जाना चाह रही थी लेकिन भागवत गीता ने उन्हें प्रेरणा दी और आज वे राष्ट्रीय प्रेरणा बनी है। इस सच्ची कहानी के किरदार से असफल लोग जीवन में सफलता की राह खोज सकते है, खोजेंगे भी। आइए नीरज और मनु की शादी कराए!

16 Aug 2024 01:11AM,
by: Babuaa Desk
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  ओलम्पिक खेलों में भाग लेने वाले हर देश के खिलाड़ी k पहला उद्देश्य देश और खुद के लिए पदक जीतना होता है। हर देश और खिलाड़ी पदक जीत नही सकते है।ओलंपिक खेल का आदर्श है -जीतो तो गर्व नहीं हारो तो शर्म नहीं। जीत हार से ऊपर प्रतिद्वंदिता है और खेल भावना है। भारत के सभी राजनैतिक दलों को ये सीखने की आदत डालने की सख्त जरूरत है। सत्ता में है तो सुनना नहीं और विपक्ष में है तो केवल विरोध करना,शर्मनाक है। विनेश फोगाट का उदाहरण सामने है। राजनीति के खिलाड़ी, खेल के मामले में ज्यादातर अंगूठा छाप होते है। सामान्य ज्ञान और विशिष्ट ज्ञान में जमीन आसमान का फर्क होता है। राजनीति से जुड़ाव रखने वाले खेल में मामले में उतने ही अनाड़ी होते है जितना खिलाड़ी, राजनीति के मामले में  पदकों की दौड़ में अमेरिका का प्रभुत्व

14 Aug 2024 06:10AM,
by: Babuaa Desk