खेल ओर खिलाड़ी विषयो पर लेख लिखने से पहले उनके प्रदर्शन को देखना अनिवार्य होता है। इसे उनकी मेहनत को साकार होते देखा जा सकता है। आदमी, सामाजिक प्राणी है। परिवार, समाज में रहता है ।मनुष्य होने के कारण उसके मनोभाव दिखते है। किसी भी व्यक्ति में अपने या अपने परिवार के सदस्य को देखना साधारण बात है। इन दिनों पेरिस में पैरा ओलंपिक खेलों का आयोजन चल रहा है। ये खेल उन लोगो के लिए है जिनके सारे अंग नहीं है।वे संपूर्णांग न होकर विकलांग है। उनमें से अनेक खिलाड़ियों को देख कर मन द्रवित हो जाता है लेकिन अगले ही पल उनके प्रति सम्मान बढ़ जाता है ये सोच कर कि विपरीत परिस्थितियों में भी इन्होंने हिम्मत नही हारी। एक अंग न होने पर बहाना नहीं बनाया, कृपा के पात्र नहीं बने बल्कि खुद को ऐसे सांचे में ढाला कि आज करोड़ो अरबों लोग इनके प्रदर्शन पर तालियां बजा रहे है। धनुर्धर शीतल कुमारी और प्रेरणा
04 Sep 2024 10:49AM,by: Babuaa Desk
मनोरंजन की दुनियां में हमारे पास दूरदर्शन के आने से पहले केवल सिनेमा हॉल हुआ करते थे।दूरदर्शन आया तो घर के ड्राइंग रूम टेलीविजन हाल में बदल गया। ब्लैक एंड व्हाइट स्क्रीन का दौर खत्म हुआ और कलर्ड स्क्रीन आया तो दो कालजई धारावाहिक का प्रसारण हुआ था।रामायण और महाभारत। रामायण मर्यादित था, देखते हर कोई थे लेकिन कोई भी राम सीता बनना नहीं चाहते थे। महाभारत,पसंदीदा धारावाहिक बना क्योंकि कलयुग का शुभारंभ करने वाला द्वापर यही से विदा हुआ था। एक तो राही फिर मासूम और उस पर रज़ा
02 Sep 2024 01:05AM,by: Babuaa Desk
पेरिस ओलंपिक से जब ये खबर आई कि अवनि लेखरा ने दोबारा 10मीटर एयर राइफल में गोल्ड मेडल जीत लिया है तो कोई आश्चर्य नहीं हुआ क्योंकि अवनि जिस तरह से पिछले चार साल से प्रदर्शन कर रही थी उससे थोड़ा भी संशय नहीं था कि अवनि पेरिस में टोक्यो का रिप्ले नही करेगी। हिम्मत से आगे अवनि लेखरा
01 Sep 2024 10:36AM,by: Babuaa Desk
भारत को देश दुनियां में 1971के पहले तक किस खेल में जाना जाता था, अगर ये प्रश्न संघ लोक सेवा आयोग सहित किसी भी प्रतियोगी परीक्षा में पूछा जाता तो एक ही उत्तर होता -हॉकी। ये प्रश्न भी पूछ लिया जाता कि दुनियां में हॉकी का जादूगर किसे कहा जाता है तो भी मेजर ध्यानचंद का नाम आसानी से ले लिया जाता। ध्यानचंद का ध्यान किसे है..?
29 Aug 2024 05:13PM,by: Babuaa Desk
एक लेखक होने के नाते मैं ये स्वीकार करता हूं कि कलम का सिपाही अज्ञात हुआ करता है। उसका लिखा सबको याद रहता है, ये मुगालता है। बहुत कम लेखक होते है जो सर्वकालीन हुआ करते है। लेखन गद्य और पद्य शैली में स्वीकृत है। पद्य में तुकबंदी होने के कारण याद करने में आसानी होती है। इसी कारण गाए जा सकने वाले गीतों का सृजन हुआ। अशिक्षा के बावजूद गीतों ने अनपढ़ो को भी गाने का अवसर दिया। आज की रात हुस्न का मजा आंखों से लीजिए
24 Aug 2024 05:37AM,by: Babuaa Desk
प्राचीन इतिहास को उठाकर देखे तो ओलंपिक खेलों में सबसे प्रतिष्ठित खेल मैराथन को माना जाता है। इस खेल की शुरुआत का अपना इतिहास है। 490ईसा पूर्व मैराथन युद्ध जीतने के बाद जीत की खबर ग्रीस तक पहुंचाने के लिए फ़िडीप्पीडिस को चुना गया। मैराथन से ग्रीस तब के जमाने लगभग 42किलोमीटर दूर हुआ करता था। फ़िडीप्पीडिस इस दूरी को तय करते हुए ग्रीस के चौक पर पहुंचा और जीत की खबर सुनाने के बाद मर गया। इस घटना को अविस्मरणीय बनाने के लिए प्राचीन ओलंपिक खेलों में मैराथन प्रतियोगिता आयोजित होने लगी। ओलम्पिक खेलों का सरताज खेल -मैराथन
20 Aug 2024 02:24AM,by: Babuaa Desk
एक तरफ दो मेडल जीतने वाली मनु भाकर के जीत के चर्चे है बहुतायत से।उनकी जीत की बाते है क्योंकि वे तीन मेडल लाते लाते रह गई।उनके बारे में चर्चा है कि वे पहली भारतीय खिलाड़ी है जिन्होंने एक ओलम्पिक खेल में दो पदक जीते है। उनकी चर्चा ये भी है कि वे डीएवी कालेज चंडीगढ़ की पोस्ट ग्रेजुवेट स्टूडेंट है। ये भी बात है कि 22साल की उम्र में 12करोड़ रुपए उनके पास है। ये भी चर्चा है कि उन्होंने कम उम्र में केरल में हुए राष्ट्रीय खेल में एक दो तीन नहीं बल्कि 9गोल्ड मेडल जीते थे। ये भी बात है कि जूनियर ओर सीनियर वर्ल्ड शूटिंग स्पर्धा में भी उन्होंने गोल्ड मेडल जीता हुआ है। राष्ट्र मंडल खेल का भी गोल्ड मेडल मनु के पास है।देश की करोड़ो युवतियों के लिए ही नहीं बल्कि करोड़ो युवकों के लिए भी मनु भाकर रोल मॉडल है। मनु 2021के टोक्यो ओलंपिक खेलों में असफल रही थी। असफलता ने मनु को तोड़ कर रख दिया था। वे खेल से बाहर हो जाना चाह रही थी लेकिन भागवत गीता ने उन्हें प्रेरणा दी और आज वे राष्ट्रीय प्रेरणा बनी है। इस सच्ची कहानी के किरदार से असफल लोग जीवन में सफलता की राह खोज सकते है, खोजेंगे भी। आइए नीरज और मनु की शादी कराए!
16 Aug 2024 01:11AM,by: Babuaa Desk
ओलम्पिक खेलों में भाग लेने वाले हर देश के खिलाड़ी k पहला उद्देश्य देश और खुद के लिए पदक जीतना होता है। हर देश और खिलाड़ी पदक जीत नही सकते है।ओलंपिक खेल का आदर्श है -जीतो तो गर्व नहीं हारो तो शर्म नहीं। जीत हार से ऊपर प्रतिद्वंदिता है और खेल भावना है। भारत के सभी राजनैतिक दलों को ये सीखने की आदत डालने की सख्त जरूरत है। सत्ता में है तो सुनना नहीं और विपक्ष में है तो केवल विरोध करना,शर्मनाक है। विनेश फोगाट का उदाहरण सामने है। राजनीति के खिलाड़ी, खेल के मामले में ज्यादातर अंगूठा छाप होते है। सामान्य ज्ञान और विशिष्ट ज्ञान में जमीन आसमान का फर्क होता है। राजनीति से जुड़ाव रखने वाले खेल में मामले में उतने ही अनाड़ी होते है जितना खिलाड़ी, राजनीति के मामले में पदकों की दौड़ में अमेरिका का प्रभुत्व
14 Aug 2024 06:10AM,by: Babuaa Desk
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