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 1932 से लेकर 1970 तक भारतीय क्रिकेट टीम को औसत दर्जे की टीम माना जाता था।विदेशों में जीत मृग मरीचिका थी। न्यूज़ीलैंड से एकात सीरीज भले ही जीत लिए थे लेकिन इंग्लैंड जिसे क्रिकेट की काशी कहा जाता है वहां जीत नहीं मिली थी। ब्लेक स्ट्रॉम कहे जाने वेस्ट इंडीज , ऑस्ट्रेलिया में सीरीज जीतना मानो स्वप्न था। इसके चलते भारतीय क्रिकेट टीम को भाव नही मिलता था। 1971 में मुम्बई से एक ओपनर बल्लेबाज़ वेस्ट इंडीज दौरे के लिए सुनील गावस्कर का चयन हुआ। ये बल्लेबाज़ घरेलू क्रिकेट में बेहतर प्रदर्शन कर रहा था। वेस्टइंडीज दौरे में प्रदर्शन मैच में इस बल्लेबाज़ ने 125 रन की पारी खेला। पहले टेस्ट मैच में इस बल्लेबाज को जगह नही मिली लेकिन दूसरे टेस्ट के दोनो परियों में ये बल्लेबाज़ शतक की ओर बढ़ रहा था तब कप्तान अजीत वाडेकर ईश्वर से प्रार्थना कर रहे थे कि ये शतक न बना सके। क्यो? सुनील "लिटिल मास्टर" गावस्कर

10 Jul 2024 07:20AM,
by: Babuaa Desk
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    सामाजिक परिवेश में संबंधों का विशेष महत्व होता है।इसमें दो प्रकार के रिश्ते होते है।प्रत्यक्ष और परोक्ष। प्रत्यक्ष रिश्ते माता पिता के कारण बनते है। भाई, बहन, चाचा चाची, बुआ फूफा, मौसा मौसी मामा मामी आते है। परोक्ष रिश्ते में प्रत्यक्ष संबंध से जुड़े रिश्ते आते है। जैसे चाची के भाई, भाभी, आदि,आदि। राजनीति में रिश्तों की सिमितता है। इस क्षेत्र में झखमारी का रिश्ता होता है।सामने वाले को क्या कहे? राजनीति पुरुष सत्तात्मक है, दस प्रतिशत महिलाएं राजनीति में है और वे जगत दीदी तक सीमित है। रिश्ते की राजनीति में परिवारवाद जन्म लेता है, फलता है, फूलता है। लेकिन राजनीति में रिश्तेदारी कार्यकर्ताओं की राजनैतिक मजबूरी होती है। इस कारण वे नेतृत्व कर्ता से सामाजिक संबंध बनाने के लिए रिश्ते को राजनैतिक नाम देते है। इनमे सबसे ज्यादा प्रचलित रिश्ता "भाई" का रहा है। राजनीति में निर्वाचित जनप्रतिनिधि का मूल्य ज्यादा होता है क्योंकि वे बहुमत के नेतृत्वकर्ता हुआ करते है। अमूमन सौ में से निन्यानवे जन प्रतिनिधि "भईया" ही कहलाए जाते है लेकिन छत्तीसगढ़ में समय के साथ राजनीति में रिश्तेदारी ने संबोधन बदला है। राजनीति में रिश्ता और रिश्ते में राजनीति

09 Jul 2024 08:42AM,
by: Babuaa Desk